अयोध्या। विश्व हिंदू परिषद की केंद्रीय प्रन्यासी मंडल एवं प्रबंध समिति की बैठक का शुभारंभ कारसेवक पुरम में रविवार को हुआ। बैठक में देश में एक लाख स्थानों पर संगठन के विस्तार की योजना बनाई गई। साथ ही धर्मांतरण व लव जिहाद पर अंकुश लगाने को लेकर मंथन किया गया। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद देश रामराज्य की दिशा में किस तरह आगे बढ़े, इसको लेकर भी चर्चा हुई।
विहिप के कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने मतांतरित लोगों की घर वापसी के लिए चलाए जा रहे अभियान में तेजी लाने की बात कही। उन्होंने कहा कि ईसाइयों ने भारत में 350 सालों तक अत्याचार किया है। देश में बड़े पैमाने पर धर्मांतरण चल रहा है। विहिप की स्थापना के 60 वर्ष पूरे हो चुके हैं। हमें देश के सभी गांवों तक पहुंचने की रणनीति पर काम करना होगा।
केंद्रीय महामंत्री मिलिंद परांडे ने पिछले छह माह के कार्यों का विश्लेषण करते हुए कहा, हिंदू समाज को आत्मनिर्भर बनाने के लिए विहिप सेवा के कार्यों में तेजी लाएगी। सनातन परंपरा के विस्तार से ही अलगाववाद जैसी गतिविधि समाप्त होगी।
बैठक की अध्यक्षता कर रहे महंत डॉ़ रामानंद दास ने कहा कि विहिप के संघर्ष का परिणाम है कि केंद्र व राज्य में राष्ट्रवादी सरकार है। राष्ट्रवाद का जो बीज अंकुरित होकर वृक्ष के रूप में प्रकट हुआ है, उसकी जड़ों को और मजबूत करने की आवश्यकता है। हमें राष्ट्रवाद की अलख जगाए रखना होगा। ऐसा रहा तो वह दिन दूर नहीं जब हम अखंड भारत को प्राप्त कर लेंगे।
बैठक में विहिप के पालक राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पूर्व सरकार्यवाह भैया जी जोशी, विहिप संरक्षक दिनेश चंद्र, अध्यक्ष डॉ़ आरएन सिंह, कार्याध्यक्ष आलोक कुमार, उपाध्यक्ष चंपत राय, धर्मनारायण शर्मा, जीवेश्वर मिश्र, संगठन महामंत्री विनायक राव देश पांडेय, महामंत्री मिलिंद परांडे, संयुक्त महामंत्री कोटेश्वर शर्मा, डॉ़ सुरेंद्र जैन, अंबरीश सिंह, गजेंद्र सिंह समेत विश्व भर से आए 400 पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।
विहिप ने की संदेशखाली कांड की निंदा
बैठक में संदेशखाली कांड की निंदा करते हुए विहिप के पदाधिकारियों ने कहा कि बंगाल में अस्थिरता का दौर चल रहा है। विगत दिनों बंगाल में माता-बहनों और साधु-संतों पर जो अत्याचार अराजकतत्वों ने किया वह निंदनीय है। बैठक में कहा गया कि ऐसी घटनाएं भविष्य में दोबारा न हों इसके हिंदू हितकारी लोगों को ही सत्ता में लाना होगा।