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UP : राम मंदिर आंदोलन के नेता विनय कटियार बोले - जो ठाना था वह पूरा हो गया, अब मंदिर जाकर क्या देखना

Wed, 18 Mar 2026 05:42 PM IST
Ishwar Ashish Bhartiya नितिन मिश्र, अमर उजाला, अयोध्या

सार

बजरंग दल के संस्थापक और राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख नेता विनय कटियार ने अमर उजाला से विशेष बातचीत में उन्होंने एक ऐसा बयान दिया, जो हैरान भी करता है और भावुक भी। उन्होंने आंदोलन को लेकर भी बात की: 
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बजरंग दल के संस्थापक और राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख नेता विनय कटियार - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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राम मंदिर निर्माण का सपना साकार हो चुका है। वर्षों का संघर्ष, तप और त्याग अब भव्यता में बदल चुका है। लेकिन इस ऐतिहासिक क्षण में भी एक ऐसा चेहरा है, जो चर्चा के केंद्र में है। बजरंग दल के संस्थापक और राम मंदिर आंदोलन के प्रमुख नेताओं में रहे बजरंगी के नाम से मशहूर विनय कटियार।
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अमर उजाला से विशेष बातचीत में उन्होंने एक ऐसा बयान दिया, जो हैरान भी करता है और भावुक भी। 'निमंत्रण मेरे आगे-पीछे घूम रहा है लेकिन मैं जाऊंगा नहीं।' चैत्र प्रतिपदा 19 मार्च को राम मंदिर में भव्य समारोह का आयोजन हो रहा है। इसमें मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू शामिल होंगी। समारोह में मंदिर आंदोलन के उन कारसेवकों को भी आमंत्रित किया गया है। जिन्होंने 1984 से लेकर 2002 के बीच मंदिर आंदोलन में अपनी अहम भूमिका निभाई थी।

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पहली बार किसी बड़े समारोह में कारसेवकों को आमंत्रित किए जाने के निर्णय की विनय कटियार ने प्रशंसा करते हुए कहा, "देश की राष्ट्रपति आ रही हैं। उनका भव्य स्वागत होना चाहिए। हालांकि मैं इस कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बनूंगा। जो सपना था वह पूरा हो गया है अब मन में बस विरक्ति का भाव है।'

पेश है विनय कटियार से बातचीत के अंश.....
सवाल : जब राम मंदिर बन गया, तो अब न जाने की वजह क्या है?
जवाब-
देखिए, मंदिर बनना ही हमारे जीवन का सबसे बड़ा सपना था। हमने जो ठाना था, वह पूरा हो गया। अब वहां जाकर क्या देखना? जो संतोष चाहिए था, वह मन में पहले ही आ चुका है।
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सवालः आंदोलन के दिनों की कौन-सी स्मृतियां आज भी सबसे ज्यादा याद आती हैं?
जवाब: 
वो दौर केवल आंदोलन नहीं था, एक जन-जागरण था। गांव-गांव से लोग निकलते थे, बिना किसी स्वार्थ के। हमने सड़कों पर संघर्ष किया, लाठियां खाई, जेल गए। कई बार ऐसा लगा कि अब शायद यह सपना अधूरा रह जाएगा, लेकिन आस्था और संकल्प ने कभी हार नहीं मानी।

सवालः क्या कोई ऐसा पल है, जो आज भी दिल को छू जाता है?
जवाब:  
हाँ, जब पहली बार लाखों कारसेवक अयोध्या की ओर बढ़े थे। उनके चेहरे पर जो आस्था थी, वही असली ताकत थी। कई लोग अपने परिवार, नौकरी सब छोड़कर आए थे। वो त्याग ही इस मंदिर की नींव है।

सवालः आज जब मंदिर बन गया, तो क्या कोई नया सपना है?
जवाब :
(मुस्कुराते हुए) नहीं, अब कोई सपना नहीं है। राम मंदिर ही जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य था। जब वही पूरा हो गया, तो अब कुछ बाकी नहीं।

सवालः आज की पीढ़ी को क्या संदेश देना चाहेंगे?
जवाब-
इतिहास को समझिए, संघर्ष को जानिए। यह मंदिर केवल पत्थरों का ढांचा नहीं है, यह करोड़ों लोगों की आस्था, तप और बलिदान का प्रतीक है।
 
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