डॉ. संजीव ने बताया कि संग्रहालय को आधुनिक और अनुभवपरक बनाने के लिए प्रधानमंत्री संग्रहालय में इस्तेमाल की गई तकनीकी अवधारणाओं से भी प्रेरणा ली जा रही है। गैलरियों में किस तकनीक का इस्तेमाल होगा, इसे अंतिम रूप देने की प्रक्रिया चल रही है।
तकनीक के साथ कथा और प्रस्तुति का ऐसा संयोजन तैयार किया जा रहा है, जिससे आगंतुक केवल रामकथा को देखें नहीं, बल्कि उसे अनुभव भी कर सकें। निरीक्षण के दौरान विहिप के वरिष्ठ मार्गदर्शक दिनेशचंद्र, उमेश पोरवाल, जगदीश आफले सहित निर्माण निगम के प्रबंधक कैवल्य मिश्र भी मौजूद रहे।
पटकथा और तकनीक पर सीईओ ने दिए सुझाव
जितेंद्र मिश्र ने गैलरियों की पटकथा और उनकी कथात्मक प्रस्तुति को देखा। प्रस्तुतीकरण के दौरान उन्होंने कुछ सुझाव भी दिए, जिन पर संग्रहालय की टीम ने तत्काल समाधान और प्रस्तावित व्यवस्था की जानकारी दी। उन्होंने संग्रहालय की परिकल्पना और तैयार की जा रही पटकथा की सराहना की। उन्होंने संग्रहालय की वर्तमान प्रगति, आगामी कार्य और अंतिम स्वरूप को लेकर भी जानकारी ली।