सार
एनआरएचएम घोटाले और आय से अधिक संपत्ति के मामले में पूर्व विधायक को गिरफ्तार किया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार उनके खिलाफ भ्रष्टाचार, वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी धन के दुरुपयोग से जुड़े कई मामले दर्ज हैं। विभिन्न जिलों में हुई कथित अनियमितताओं की जांच जारी है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
बहराइच की पयागपुर सीट से पूर्व कांग्रेस विधायक मुकेश श्रीवास्तव को विजिलेंस ने बुधवार को आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में गिरफ्तार कर लिया। उनके खिलाफ एनआरएचएम घोटाले में भी कई एफआईआर दर्ज हैं। मुकेश श्रीवास्तव, उनकी पत्नी और भाई को सीबीआई ने भी गिरफ्तार किया था। वहीं ईडी ने भी उनके खिलाफ मनी लांड्रिंंग का केस दर्ज किया था, जिसकी जांच जारी है। विजिलेंस ने बीते 10 दिन के दौरान श्रावस्ती और बलरामपुर में एनआरएचएम योजना के तहत कराए गए कामों में घोटाला करने के आरोप में भी उनके खिलाफ केस दर्ज किया हैं।
आईजी विजिलेंस मंजिल सैनी ने बताया कि मुकेश श्रीवास्तव उर्फ ज्ञानेंद्र प्रताप श्रीवास्तव के खिलाफ वर्ष 2023 में विजिलेंस ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने की एफआईआर दर्ज की थी। शासन ने उनके खिलाफ वर्ष 2021 में विजिलेंस को गोपनीय जांच करने का आदेश दिया था। विजिलेंस ने जांच कर अपनी अंतिम रिपोर्ट 12 अक्टूबर 2022 को शासन को सौंपी थी।
रिपोर्ट के मुताबिक मुकेश श्रीवास्तव ने अपनी आय के सभी वैध स्रोतों से कुल 1,12,65,635 रुपये अर्जित किए थे, जबकि चल-अचल संपत्तियों को खरीदने और भरण-पोषण में 1,79,96,526 रुपये व्यय किए। इस तरह उन्होंने अपनी वैध आय से 67,30,891 रुपये (59.74 प्रतिशत) अधिक व्यय किए। इस अंतर के बारे में वह विजिलेंस को कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे सके थे।
जिसके बाद शासन की अनुमति पर विजिलेंस ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं में मुकदमा दर्ज कर विवेचना की थी। विजिलेंस ने उनके ठिकानों पर मारे गए छापों में भ्रष्टाचार के पुख्ता सुबूत जुटाए थे। इसकी गहन विवेचना के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उनसे ईडी भी बीते वर्ष गहन पूछताछ कर चुकी है।
कांग्रेस से सपा में गए
पूर्व विधायक मुकेश श्रीवास्तव का वर्ष 2014 में एनआरएचएम घोटाले में नाम आने के बावजूद कांग्रेस ने उनको बहराइच से लोकसभा का टिकट दिया था। हालांकि बाद में वह समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए और वर्ष 2017 और 2022 में सपा के टिकट पर पयागपुर से चुनाव लड़ा, जिसमें उनको शिकस्त मिली। उनके खिलाफ पूर्व में भी नौ मुकदमे दर्ज रहे हैं।