एलएंडटी और टाटा के चयन में भी भूमिका
दस्तावेज के अनुसार मंदिर निर्माण के लिए लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) को चुना गया और समकक्ष स्तर की प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंसी के लिए टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स (टीसीई) का चयन किया गया। मंदिर के वास्तुकार के रूप में अहमदाबाद निवासी चंद्रकांत भाई सोमपुरा को 1986 में अशोक सिंहल ने चुना था और उन्हें ही आगे भी रखा गया। वहीं अन्य भवनों के निर्माण के लिए नोएडा की डिजाइन एसोसिएट फर्म और उसके प्रमुख जय कानिटकर का चयन नृपेंद्र मिश्रा ने किया।
रामकथा संग्रहालय की योजना को भी आगे बढ़ाया
अंतरराष्ट्रीय रामकथा संग्रहालय को लेकर भी नृपेंद्र मिश्रा की भूमिका का उल्लेख किया गया है। चंपत राय के अनुसार नृपेंद्र मिश्रा ने विचार किया कि उत्तर प्रदेश सरकार और ट्रस्ट के अलग-अलग संग्रहालय बनाने के बजाय मौजूदा संग्रहालय को ही विकसित करना अधिक व्यवहारिक होगा। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार से बातचीत हुई और 30 वर्ष के लिए संग्रहालय भवन ट्रस्ट को लीज पर मिला। इसके बाद संग्रहालय के जीर्णोद्धार और विकास की जिम्मेदारियां तय की गईं।