'रामनगरी की याद कुछ ज्यादा ही आ रही'
अब तो अयोध्या आते रहेंगे…। अखिलेश यादव का यह संदेश ऐसे समय आया है, जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे राजनीतिक गतिविधियों के केंद्र में आ रही हैं। अखिलेश की इस पोस्ट के बाद एक यूजर ने लिखा कि लगता है चुनावी मौसम में रामनगरी की याद कुछ ज्यादा ही आ रही है।
ऐसे कालनेमियों से लोग सावधान रहें। एक अन्य यूजर ने लिखा कि जिन्होंने सरयू को कारसेवकों के रक्त से रंजित किया आज वही लोग चुनाव नजदीक आने पर गमछा, त्रिशूल और भागवत कथा के माध्यम से श्रद्धा का प्रदर्शन कर रहे हैं।
अखिलेश यादव के संदेश पर महंत बालयोगी रामदास ने कहा कि उनका यह कहना कि अब अयोध्या आते रहेंगे, अच्छी बात है। अयोध्या सबकी है और भगवान श्रीराम सबके हैं। अखिलेश यादव ने अयोध्या के विकास की जो मंशा दर्शाई है वह काबिल-ए-तारीफ है। उनका संतों के बीच आना और धार्मिक आयोजनों में शामिल होना सामाजिक समरसता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। अयोध्या में जब भी आएंगे उनका भव्य स्वागत होगा।
अखिलेश के मंच पर राम मंदिर के पुजारी ने खींचा ध्यान
भागवत कथा के मंच पर संतों और सपा नेताओं ने अखिलेश यादव को गदा, चक्र और त्रिशूल भेंट किए थे। अखिलेश का संतों के साथ बैठना, भोजन करना और धार्मिक प्रतीकों के साथ उनकी तस्वीरें सामने आना भी राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बना। सबसे ज्यादा ध्यान राम मंदिर के पुजारी संतोष तिवारी की मौजूदगी ने खींचा।
अखिलेश यादव बृहस्पतिवार को जिस मंच पर थे उसी मंच पर राम मंदिर के पुजारी संतोष तिवारी भी मौजूद थे। हालांकि अखिलेश के मंच पर पहुंचने के कुछ देर बाद ही पुजारी कार्यक्रम स्थल से निकल गए। इससे पहले अखिलेश ने उनसे आशीर्वाद लिया था।