कार्यों की गति का आकलन किया जाएगा
निर्माण समिति की बैठक में ठेकेदारों के भुगतान और अन्य वित्तीय मामलों की समीक्षा भी की जा रही है। एलएंडटी से जुड़े भुगतान संबंधी मामलों को पूरा कराने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इसके साथ ही मंदिर परिसर के बाहर निर्माणाधीन ऑडिटोरियम और म्यूजियम की प्रगति पर भी चर्चा होगी। इन दोनों परियोजनाओं के निर्माण की स्थिति और कार्यों की गति का आकलन किया जाएगा।
नृपेंद्र मिश्र ने बताया कि विजय स्तंभ और शहीद स्मारक का निर्माण पूरा हो चुका है। हालांकि, इन स्मारकों के परिसर में उद्यान और हॉर्टिकल्चर से संबंधित कुछ कार्य अभी बाकी हैं। वहीं, मध्वाचार्य द्वार का निर्माण करीब 80 प्रतिशत पूरा हो गया है। निर्माण समिति निर्माण स्थलों का निरीक्षण कर कार्यों की प्रगति का आकलन करेगी। साथ ही निर्माण में आ रही कठिनाइयों की जानकारी लेकर उन्हें दूर करने के उपायों पर भी चर्चा होगी।
उन्होंने बताया कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद एलएंडटी संबंधित ड्राइंग, डिजाइन, अभिलेख और वित्तीय प्रक्रिया को अंतिम रूप देकर ट्रस्ट को सौंपती है। इसके बाद ट्रस्ट के परियोजना इंजीनियर कार्यों का निरीक्षण करते हैं। जांच और आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही ट्रस्ट निर्माण कार्यों का हस्तांतरण स्वीकार करता है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, दस्तावेजों और वित्तीय विवरणों का सत्यापन सुनिश्चित करना है।
परकोटे के हस्तांतरण से पहले पूरी होगी तकनीकी प्रक्रिया
राम मंदिर परिसर में परकोटे का निर्माण पूरा होने के बाद भी इसे तत्काल ट्रस्ट को नहीं सौंपा जाएगा। इसके लिए निर्माण एजेंसी एलएंडटी को तकनीकी और वित्तीय दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी करनी होगी। इसमें ड्राइंग, डिजाइन, निर्माण संबंधी अभिलेख और वित्तीय विवरण शामिल हैं।
इसके बाद ट्रस्ट के परियोजना इंजीनियर मौके पर निर्माण कार्यों की जांच करेंगे। निरीक्षण में आवश्यक मानकों और दस्तावेजों की पुष्टि के बाद ही हस्तांतरण स्वीकार किया जाएगा। फिलहाल परकोटे की छत पर वॉटर ट्रीटमेंट का काम अधूरा है, जो बारिश के कारण प्रभावित हुआ है। इसे पूरा करने के लिए 15 नवंबर तक का लक्ष्य रखा गया है।