जैन एकता सम्मेलन में ध्वजारोहण करते जैन श्रद्धालु।
अयोध्या। रायगंज स्थित दिगंबर जैन मंदिर में आयोजित जैन एकता सम्मेलन में समाज में एकजुटता, सहयोग और संवेदनशीलता को मजबूत करने का आह्वान किया गया। कार्यक्रम में दिगंबर जैन तीर्थ क्षेत्र कमेटी के अध्यक्ष एवं पीठाधीश रवींद्रकीर्ति स्वामी ने कहा कि एकता और एकात्मता ही मानवीय संभावनाओं की सबसे बड़ी शक्ति है।
उन्होंने कहा कि यदि मनुष्य अपने जीवन में समाज और प्रकृति के साथ एकत्व स्थापित कर ले, तो वह उच्चतम आध्यात्मिक अवस्था को प्राप्त कर सकता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि हर व्यक्ति को एक-दूसरे का सहयोगी बनना चाहिए और सुख-दुख में साझीदार बनकर समाज में प्रेम और समृद्धि की भावना को मजबूत करना चाहिए। कार्यक्रम में दिगंबर जैन महासमिति के कार्यवाहक अध्यक्ष विपिन जैन ने समाज के एक महत्वपूर्ण पक्ष को सामने रखते हुए बताया कि जैन समाज को केवल समृद्ध मानना एक भ्रम है। उन्होंने कहा कि 84 जातियों में विभाजित इस समाज की करीब 30 जातियां आज भी पिछड़ेपन और मूलभूत आवश्यकताओं की कमी से जूझ रही हैं।
उन्होंने बताया कि महासमिति इन वर्गों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें मुख्यधारा से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। साथ ही, ऐसे सम्मेलन समाज को भावनात्मक रूप से एकजुट करने का महत्वपूर्ण माध्यम बन रहे हैं। सम्मेलन को जैन धर्म की प्रमुख साध्वी ज्ञानमती और आर्यिका चंदनामती का भी आशीर्वाद प्राप्त हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत धर्म ध्वजारोहण से हुई, जबकि पूजन-अनुष्ठान प्रतिष्ठाचार्य विजयकुमार जैन और दिगंबर जैन युवा परिषद के अध्यक्ष डॉ. जीवनप्रकाश जैन के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। सम्मेलन में करीब 600 प्रतिनिधियों सहित सैकड़ों श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही।