अयोध्या। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के तीसरे दिन भी रामनगरी में जयघोष गूंजता रहा। बृहस्पतिवार को पौष पूर्णिमा का भी संयोग रहा। ऐसे में अयोध्या पहुंचे भक्तों ने न सिर्फ पावन सलिला सरयू में पुण्य की डुबकी लगाई, बल्कि रामलला के दर्शन को भी आतुर दिखे। रामनगरी सुबह चार बजे से ही से भक्तों से गुलजार हो गई। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक पौष पूर्णिमा पर करीब ढाई लाख भक्तों ने अयोध्या आकर सरयू स्नान व मठ-मंदिरों में दर्शन किए।
पौष माह के शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि पौष पूर्णिमा कहलाती है। इस साल पौष पूर्णिमा बृहस्पतिवार को मनाई गई। पौष पूर्णिमा पर पवित्र नदियों में स्नान-दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। सभी कष्ट और दोष दूर हो जाते हैं। माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है। इस बार पौष पूर्णिमा पर सात ऐसे संयोग रहे जो बेहद शुभ माने जाते हैं। इनमें गुरु पुष्य योग, अमृत सिद्धि, रवि योग, सर्वार्थ सिद्धि, प्रीति योग, त्रिग्रही योग और गुरु योग का संयोग रहा। इन शुभ संयोगों में सरयू स्नान करने भक्तों का रेला उमड़ा। तड़के से ही सरयू के घाटों पर जयकारे गूंजने लगे थे। भीषण शीतलहर व कड़कड़ाती ठंड के बीच रामनाम के बल पर भक्त सरयू में डुबकी लगाते रहे। सरयू में स्नान-दान के बाद भक्तों का कारवां राम जन्मभूमि व हनुमानगढ़ी दर्शन के लिए निकल पड़ा। भक्तों मे सबसे ज्यादा ललक नवनिर्मित महल में विराजे बालक राम के दर्शन की रही। राम नगरी दिन भर रामधुन गुनगुनाती रही।
बजाओ ढोल स्वागत में मेरे घर राम आए हैं... भजन पर नृत्य करते हुए श्रद्धालुओं का जत्था सरयू तट से राममंदिर की ओर बढ़ा जा रहा था। पटना बिहार से आए श्रद्धालु श्याम दिनकर ने कहा अयोध्या आकर अभिभूत हूं। वहीं नागपुर से करीब 150 श्रद्धालु ड्रम बजाते अयोध्या पहुंचे। इन श्रद्धालुओं ने भी रामलला के दरबार में हाजिरी लगाई। नेपाली बाबा के यज्ञ में शामिल करीब आठ हजार भक्तों ने भी गुरुवार को रामलला के दरबार में माथा टेका, इसमें बड़ी संख्या में नेपाली भक्त भी शामिल रहे। नेपाल से आए सोमनाथ थंपा ने कहा कि वे पिछले 10 दिनों से अयोध्या में हैं, पहले रामनाम महायज्ञ में शामिल होने का सौभाग्य मिला और अब रामलला का दर्शन कर जीवन धन्य हो गया।