अयोध्या। लोकसभा चुनाव में अयोध्या में भाजपा की हार की शीर्ष नेतृत्व के निर्देश पर समीक्षा शुरू हो गई है। खुद पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह चौधरी ने हार के कारणों को विधानसभा क्षेत्रवार बैठक करके तलाशने की कोशिश की। इस दौरान कई अनछुए पहलू भी उनके सामने आए। प्रदेश अध्यक्ष अपनी रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को सौंपेंगे।
भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष चौधरी बुधवार को अयोध्या पहुंचे। दो दिवसीय प्रवास के पहले दिन उन्होंने मिल्कीपुर, बीकापुर और अयोध्या विधानसभा क्षेत्र की समीक्षा बैठक की। रुदौली और दरियाबाद विधानसभा क्षेत्र की बैठक बृहस्पतिवार को होगी। यहां पर उन्होंने सबसे पहले मिल्कीपुर सुरक्षित सीट पर हार की वजहों को जानने का प्रयास किया। मौजूदा समय के सपा सांसद अवधेश प्रसाद इसी सीट से विधायक रहे हैं। इस सीट पर अब उप चुनाव होना है।
इनायतनगर में हुई संगठनात्मक बैठक में पहले सभी मंडलों के पदाधिकारियों से अलग-अलग वार्ता की। हर मंडल से 15 से 16 पदाधिकारी शामिल हुए। इसके बाद विधानसभा क्षेत्र प्रभारी, संयोजक और इस विधानसभा क्षेत्र से जिला इकाई के पदाधिकारियों के साथ विमर्श किया। इन बैठकों से मीडिया को दूर रखा गया। बैठक में क्या कुछ हुआ, इसके बारे में कोई आधिकारिक जानकारी भी नहीं दी गई। इसी कड़ी में पार्टी के सहादतगंज स्थित केंद्रीय कार्यालय पर बीकापुर और सर्किट हाउस में अयोध्या विधानसभा क्षेत्र की बैठक हुई।
सूत्रों ने बताया कि तीनों विधानसभा क्षेत्र की बैठक में एक जैसी प्रक्रिया अपनाई गई। मंडलों और संबंधित विधानसभा क्षेत्र के जिला स्तरीय पदाधिकारी से हार की प्रमुख वजह बताने को कहा गया। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के सामने तीनों विधानसभा क्षेत्र में कई वजह सामने आईं। इनमें से कुछ का स्वरूप एक जैसा रहा। पदाधिकारियों ने खुलकर बताया कि 400 सीट आने पर संविधान खत्म करने को लेकर विपक्ष की ओर से बनाए गए भ्रामक माहौल ने काफी नुकसान पहुंचाया। इसे रोक पाने में भाजपा नाकाम रही। इसी तरह पिछले दो लोकसभा चुनाव में पार्टी से जुड़े रहे एससी और ओबीसी के कई वर्ग छिटक गए।
तीनों विधानसभा क्षेत्र के कार्यकर्ताओं ने एक समान वजह यह भी बताई कि थाना, तहसील, ब्लॉक और जिला स्तरीय सरकारी दफ्तरों में अधिकारी और कर्मचारियों की ओर से पार्टी कार्यकर्ताओं के जायज कामों की भी अनदेखी की गई। इससे कार्यकर्ताओं में निराशा आई और चुनाव में वे पहले की तरह सक्रिय नहीं हुए। प्रत्याशी, उनकी चुनाव टीम और जिले के पदाधिकारी से विधानसभा क्षेत्र के स्थानीय पदाधिकारी और कार्यकर्ताओं के सामंजस्य में काफी कमी रही।
अयोध्या विधानसभा क्षेत्र में निराशाजनक जीत की पूछी वजह
अयोध्या विधानसभा क्षेत्र में सिर्फ कुछ हजार मतों के अंतर से मिली निराशाजनक जीत की वजह जानने पर प्रदेश अध्यक्ष का मुख्य जोर रहा। सबसे बड़ा सवाल यही रहा कि जिस राम मंदिर की चर्चा पूरे देश के चुनाव में रही, वहीं पर पार्टी का इतना बुरा हाल क्यों हुआ। वह भी तब जब नव्य मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के कुछ ही महीने बाद चुनाव हुआ हो। बताया गया कि अयोध्या में खासतौर पर रामनगरी और उसके आसपास विकास के कई काम हुए। सड़कों का चौड़ीकरण किया गया। इसके चलते बड़ी संख्या में लोगों को अपने घरों और दुकानों से वंचित होना पड़ा। ऐसे लोगों ने किसी दूसरे दल को वोट देने की बजाय वोट देने के लिए घर से ना निकालना ज्यादा बेहतर समझा। इसी के चलते मत प्रतिशत भी कम हुआ। रामनगरी में सुरक्षा दृष्टि से कई तरह की बंदिश ने वहां के स्थानीय लोगों को भीतर से नाराज कर रखा था।
प्रत्याशी के चयन पर भी रखी अपने मन की बात
समीक्षा बैठकों में कुछ पदाधिकारियों ने प्रत्याशी चयन को लेकर भी अपने मन की बात रखी। इनका मानना था कि यदि किसी और प्रत्याशी को सामने किया जाता तो तस्वीर दूसरी होती। इसके पीछे वजह भी बताई गई। बैठक में भाजपा प्रत्याशी लल्लू सिंह की ओर से 400 सीट आने पर संविधान बदल दिए जाने के कथित बयान का वीडियो वायरल होने की भी बात उठाई गई। बताया गया कि कुछ जगहों पर प्रत्याशी ने यह भी कहा कि आप हमें थोड़े ही, पीएम मोदी और सीएम योगी को वोट देते हैं। यह मसला भी सामने आया कि कुछ एक ऐसे स्थान पर प्रत्याशी गए थे, जहां के लोग मार्ग चौड़ीकरण में अपनी जमीन और घर जाने की आशंका से ग्रसित थे। ऐसे लोगों ने जब अपने डर से अवगत कराते हुए कुछ समाधान की गुजारिश की तो उन्हें ठीक से हैंडल नहीं किया गया।
रिपोर्ट में शामिल करेंगे कार्यकर्ताओं के सुझाव : भूपेंद्र
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि फैजाबाद लोकसभा सीट के विभिन्न विधानसभा क्षेत्र के कार्यकर्ताओं के साथ अलग-अलग बैठक की गई। इस दौरान पार्टी कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नेताओं ने कई तरह के सुझाव रखे। इन्हें पार्टी नेतृत्व को दी जाने वाली रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा। समीक्षा में चुनाव अभियान में क्या कमी रह गई, क्या चूक हुई, कौन सी बात हम जनता के बीच नहीं पहुंच पाए इन सभी बिंदुओं की समीक्षा हुई है। आगामी कार्यक्रम और अभियानों पर भी चर्चा हुई है। विपक्ष के नकारात्मक एजेंडे से जनता को गुमराह किए जाने के बावजूद भाजपा को तीसरी बार सरकार बनाने का जनादेश मिला है। लगातार तीसरी बार नरेंद्र मोदी देश के प्रधानमंत्री बने हैं।