बीकापुर। क्षेत्र के किसानों की मेहनत इस बार रंग ला रही है। टमाटर की खेती उनके लिए मुनाफे का सौदा साबित हुई है। पिछले कई बरसों से टमाटर उत्पादक किसान मंदी की मार झेल रहे थे। फसल तैयार होने के बाद टमाटर किसानों को खरीदार नहीं मिल सके थे। पिछले साल तो दो रुपये प्रति किलो बेचना पड़ा था।
कई वर्ष बाद टमाटर के दाम बढ़ने से किसानों के चेहरे पर मुस्कान है। पिछले वर्ष फसल तैयार होने के बाद महाकुंभ के चलते जगह-जगह हाईवे जाम होने से दूर दराज के व्यापारियों के वाहन नहीं पहुंच सके थे। जिससे फसल तैयार होने के बाद किसानों को समय पर खरीदार नहीं मिल सके। किसान दो रुपये प्रति किलो टमाटर बेचने पर मजबूर हो गए थे। कुछ किसानों ने टमाटर को खेत में ही ट्रैक्टर से जोताई करा दी थी।
इस बार व्यापारी खुद किसानों के खेतों में पहुंचकर खरीदारी कर रहे हैं। किसान वेद प्रकाश निषाद, जगराम प्रति कैरेट 25 किलोग्राम टमाटर 250 से 400 रुपये तक बिक रहा है। जबकि जनवरी और फरवरी की शुरुआत में 600 से 800 रुपये 25 किलो प्रति कैरेट तक बिक्री हुई थी।
तीन दशक पूर्व शुरू हुई टमाटर की खेती
बीकापुर नगर पंचायत क्षेत्र के सेमरा गांव में करीब तीन दशक पूर्व कुछ किसानों ने व्यावसायिक और नकदी फसल के रूप में टमाटर खेती शुरू की थी। शुरुआत में मुनाफा मिला आर्थिक स्थिति मजबूत हुई तो अन्य किसानों ने भी पारंपरिक फसलों के रकबा में कमी करके व्यावसायिक रूप से टमाटर की खेती की तरफ रुख किया। मौजूदा समय में क्षेत्र के नदरौली, बिलारी माफी, नासिरपुर मूसी, रसूलपुर मीरा, तेंदुआ माफी शहीद नगर पंचायत से सटे बैदौली, बछरामपुर, बसंतपुर, शेरपुर पारा, करनपुर आदि गांव के किसान टमाटर की खेती कर रहे हैं।
नेपाल तक पहुंचता है बीकापुर का टमाटर
यहां का टमाटर आसपास जिलों के अलावा दिल्ली, हरियाणा, महाराष्ट्र सहित अन्य प्रदेशों और नेपाल तक जाता है। किसानों ने इस बार भी सैकड़ों बीघे में टमाटर की फसल लगाई है। एक ब्लॉक एक उत्पाद के तहत टमाटर को बीकापुर विकासखंड का कृषि उत्पाद में चयन किया गया है। ब्लॉक के सहायक विकास अधिकारी ग्राम विकास बद्रीनाथ पांडेय ने बताया कि महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं आत्मनिर्भर बनने के लिए टमाटर से अचार, चटनी, जेल सहित अन्य खाद्य घरेलू घरेलू उत्पाद बनाती हैं।