अयोध्या। हनुमानगढ़ी के पुजारी राजू दास और डीएम नितीश कुमार के बीच प्रदेश सरकार के दो मंत्रियों की मौजूदगी में हुई बहस पर बहस छिड़ गई है। इस बीच पुजारी पर दर्ज आपराधिक मामलों में एफआईआर की कॉपी सामने आ गई हैं। इसके अनुसार राजू दास पर अयोध्या धाम के दो थानों में तीन केस दर्ज हैं। राजू दास के वे संदेश और वीडियो वायरल हो रहे हैं, जिसमें उन्होंने अयोध्या और भाजपा नेताओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की है।
पुजारी राजू दास पहले से ही अपने बयानों को लेकर मीडिया की सुर्खियों में बनते रहे हैं। इस बार डीएम से बहस और दो चरणों में सुरक्षा हटाए जाने की कार्रवाई चर्चा में है। पहले बात करते हैं राजू दास पर दर्ज केस की। पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक पुजारी पर 14 दिसंबर वर्ष 2013 को रामजन्मभूमि थाने में मुकदमा दर्ज हुआ। इस केस में पुलिस की ओर से आरोप पत्र भी दाखिल किया गया था।
इसी तरह वर्ष 2017 में कोतवाल अयोध्या में केस दर्ज हुआ। यह मुकदमा बेतिया मंदिर के महंत सुशील दास ने दर्ज कराया था। इसमें राजू के साथ विकास चंद श्रीवास्तव समेत आठ अन्य आरोपी बनाए गए। वर्ष 2023 में कोतवाली अयोध्या में केस दर्ज हुआ। यह मुकदमा जामवंत किला के महंत शिव नारायण दास ने दर्ज कराया था।
अब बात करते हैं राजू दास के हालिया खासतौर पर लोकसभा चुनाव में अयोध्या से भाजपा की हार के बाद के विवादित बयानों की। सोशल मीडिया पर दिए उनके ये बयान ताजा घटनाक्रम के बाद एक बार फिर वायरल हो रहे हैं। इनमें एक संदेश में उन्होंने कहा है कि अच्छा हुआ रामायण में राम जी रावण से युद्ध करने के लिए बंदरों और भालुओं को ही लेकर गए थे।
अगर अयोध्या वालों को लेकर जाते तो यहां के लोग सोने की लंका में सोने के चक्कर में रावण से भी समझौता कर लेते। इसी तरह एक वीडियो संदेश में वे लोकसभा चुनाव में हार को लेकर यह कहते दिख रहे हैं कि भाजपा के नेता कान खोलकर सुन लें, कार्यकर्ताओं की सुनवाई नहीं होगी तो यही हाल होगा। ये 2027 के विधानसभा चुनाव का भी ट्रेलर है।
पुजारी-डीएम विवाद पर चल रहा विमर्श
साेशल मीडिया पर पुजारी राजू दास और डीएम के विवाद काे लेकर दो खेमों में बंटकर विमर्श चल रहा है। इस विवाद की चर्चा सिर्फ अयोध्या तक ही सीमित नहीं है। पुजारी के जिले से बाहर रहने वाले समर्थक भी सुरक्षा हटाए जाने को लेकर नाराजगी जता रहे हैं। साथ ही चिंता भी प्रकट कर रहे हैं। इसी तरह डीएम के समर्थन में खड़े होने वाले भी कम नहीं हैं। इनका मानना है कि यदि कोई आपराधिक छवि का का हो तो उसे सरकारी सुरक्षा कैसे दी जा सकती है।
सरकारी गनर के दुरुपयोग की भी मिली थी शिकायत
डीएम नितीश कुमार ने बताया कि जब राजू दास को सरकारी सुरक्षा उपलब्ध कराई गई थी, तब इन पर दर्ज आपराधिक मामलों की जानकारी तत्कालीन अफसरों को नहीं रही होगी। इधर प्रशासन के पास कुछ लोगों ने इन पर दर्ज केस की जानकारी देने के साथ सरकारी गनर के दुरुपयोग की भी शिकायत की थी। जब इसकी जांच कराई गई तो आरोप सही पाए गए। इसके बाद चरणबद्ध ढंग से सुरक्षा हटाने की कार्रवाई की गई।