अयोध्या। गांव-गांव स्वास्थ्य सेवाओं की कड़ी मानी जाने वाली आशा बहुओं के प्रदर्शन की समीक्षा में बड़ी लापरवाही सामने आई है। एक माह में 250 आशा बहुएं ऐसी मिलीं हैं, जिन्होंने एक भी प्रसव नहीं कराया। करीब 490 आशा बहुओं का बमुश्किल खाता खुल सका। इस पर डीएम ने नाराजगी जताते हुए अपेक्षित सुधार न होने पर कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
गर्भवती महिलाओं की पहचान करके उन्हें प्रसव पूर्व जांच के लिए स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने और संस्थागत प्रसव के लिए प्रेरित करने का दायित्व आशा बहुओं का है। इसके लिए जिलेभर में 2,226 आशा बहुओं की नियुक्ति हुई है। वह गर्भवती की नियमित निगरानी, टीकाकरण और प्रसव की संभावित तिथि की जानकारी रखने के साथ जरूरत पड़ने पर अस्पताल तक पहुंचाने में भी अहम भूमिका निभाती हैं। अधिकांश आशा बहुएं तो बेहतर कार्य कर रही हैं लेकिन बीते दिनों जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में पेश हुई रिपोर्ट ने कई आशा बहुओं की लापरवाही उजागर की है।
हैरिंग्टनगंज, मया बाजार और मिल्कीपुर में ज्यादा लापरवाही
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, हैरिंग्टनगंज, मया बाजार और मिल्कीपुर क्षेत्र में सबसे ज्यादा लापरवाही सामने आई है। यहां क्रमश: 31, 34 और 28 आशा बहुओं ने माह में एक भी प्रसव नहीं कराया है। वहीं, क्रमश: 69, 59 और 66 आशा बहुओं ने एक-एक प्रसव कराए हैं। रुदौली और मवई ब्लॉक की स्थिति इस मामले अपेक्षाकृत ठीक रही है। यहां शून्य प्रसव कराने वाली आशा बहुओं की संख्या क्रमश: 13 और 11 ही रही है।
सुधार नहीं हुआ तो होगी कार्रवाई
डीएम शशांक त्रिपाठी के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने इसे गंभीरता से संज्ञान लिया है। सीएमओ ने डीसीपीएम के अलावा सीएचसी-पीएचसी स्तर तक निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। सीएमओ डॉ. देवेंद्र कुमार भिटौरिया ने बताया कि अधिकांश आशा बहुएं काफी पहले से कार्य कर रही हैं। उन्हें कार्य में सुधार के निर्देश दिए गए हैं। यदि उनमें सुधार नहीं हुआ तो उन पर कार्रवाई भी होगी।