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Ayodhya News: बूटों की धमक नहीं… अब गूंज रही है रामधुन

Sat, 06 Dec 2025 08:26 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, अयोध्या
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15-राम मंदिर से दर्शन कर बाहर आते श्रद्धालु।-संवाद
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नितिन मिश्र
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अयोध्या। रामनगरी ने शनिवार का दिन एक बदले हुए अहसास के साथ जिया। तारीख वही थी, 6 दिसंबर, जिसे बरसों तक तनाव, सतर्कता और सायरन की गूंज के प्रतीक के रूप में याद किया जाता रहा। लेकिन इस बार शहर की हवा में न तो बूटों की धमक थी, न ही किसी प्रकार की बेचैनी। उसके स्थान पर सुबह से ही रामधुन की मधुर लय, जयकारों की गूंज और श्रद्धालुओं की कतारें थीं।
स्थानीय प्रशासन ने हालांकि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए, लेकिन उनकी मौजूदगी शहर के सामान्य व्यवहार में कहीं बाधक नहीं बनी। न कहीं शौर्य दिवस, न कहीं यौम-ए-गम मनाया गया, जो आयोजन हुए भी वे परंपरा निर्वहन तक सीमित रहे। सुबह 11:20 बजे बेनीगंज स्थित मस्जिद पर शांति का माहौल दिखा। इससे आगे बढ़ने पर उदया चौराहे पर पुलिसकर्मी तो मौजूद थे, लेकिन रोकटोक नहीं थी। छह दिसंबर को स्कूल-काॅलेज बंद हुआ करते थे, लेकिन साकेत महाविद्यालय में चहल-पहल थी। एलटी-ग्रेड की परीक्षा देने विभिन्न जिलों से अभ्यर्थी आए थे। सुबह 11:35 बजे टेढ़ीबाजार चौराहे पर भी आवागमन बिना किसी रोक टोक के सुचारू था।
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सुबह 11:40 बजे राम मंदिर के प्रवेश द्वार पर श्रद्धालुओं की लंबी कतार थी। अन्य वीकेंड की अपेक्षा इस शनिवार अधिक भीड़ रही। कानपुर से आए श्रद्धालु अमन यादव बोले कि छह दिसंबर अतीत की बात हो चुकी है, अब यह शहर आगे बढ़ चुका है। हनुमानगढ़ी, कनक भवन ,नागेश्वरनाथ मंदिर से लेकर सरयू तट तक श्रद्धालुओं की भीड़ से उत्सव जैसा माहौल रहा। विभिन्न जिलों से स्कूली छात्रों का टूर रामलला के दर्शन को पहुंच रहा था, माहौल शांति, संयम और समन्वय का संदेश दे रहा था।
इनसेट
मुस्लिम इलाकों में दिखी सहजता, रही चहल-पहल

कहते हैं कि किसी शहर का वास्तविक तापमान उसकी गलियों में नापिए। सुबह 12:20 बजे अयोध्या धाम के कजियाना, कटरा, दुराही कुंआ में शुक्रवार को वही सहजता दिखाई दी जो किसी सामान्य दिन की पहचान होती है। मस्जिदों के बाहर बच्चे खेलते रहे, दुकानें खुली रहीं। बीए के छात्र नसीम बोले कि अब माहौल बदला है, हम सब मिलकर शहर को आगे बढ़ाना चाहते हैं। बुजुर्ग दुकानदार हफीज बोले कि पहले 6 दिसंबर आते ही दिल में एक बोझ सा महसूस होता था। पर आज माहौल बिल्कुल अलग है। लोग एक-दूसरे को देखकर मुस्कुरा रहे हैं।
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इनसेट
इकबाल बोले-बाबर हमारा मसीहा नहीं
अयोध्या। बाबरी मस्जिद के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने कहा कि छह दिसंबर को याद करने की अब जरूरत नहीं है। नौ नवंबर 2019 को राम मंदिर के हक में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है। हिंदू और मुसलमान दोनों ने माना है। अयोध्या में रोजगार बढ़ा है, अमन चैन कायम है। इकबाल अंसारी ने मुर्शिदाबाद में टीएमसी के निलंबित विधायक हुमायूं कबीर की ओर से बाबरी मस्जिद की नींव रखने का विरोध करते हुए कहा कि बाबर हमारा मसीहा नहीं। हिंदू-मुस्लिम का अब कोई विवाद नहीं है।अयोध्या विकास कर रही है, अयोध्या में गंगा जमुनी तहजीब है। उन्होंने शुक्रवार को दिन की शुरुआत तुलसी के पौधे पर जल अर्पित कर की और भाईचारे का संदेश दिया। वहीं मुस्लिम कारसेवक बबलू खान ने मिर्जापुर माफी स्थित अपने आवास पर छह दिसंबर के दिन मिठाई बांटी। बोले-अतीत को याद नहीं करना चाहिए। राम मंदिर मुसलमानों का भी मंदिर है।

15-राम मंदिर से दर्शन कर बाहर आते श्रद्धालु।-संवाद

15-राम मंदिर से दर्शन कर बाहर आते श्रद्धालु।-संवाद

15-राम मंदिर से दर्शन कर बाहर आते श्रद्धालु।-संवाद

15-राम मंदिर से दर्शन कर बाहर आते श्रद्धालु।-संवाद

15-राम मंदिर से दर्शन कर बाहर आते श्रद्धालु।-संवाद

15-राम मंदिर से दर्शन कर बाहर आते श्रद्धालु।-संवाद

15-राम मंदिर से दर्शन कर बाहर आते श्रद्धालु।-संवाद

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