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राम मंदिर में चंदा चोरी: 2021 से अब तक का पूरा रिकॉर्ड खंगाल रही है एसआईटी, जिम्मेदारों की भी पड़ताल शुरू

Wed, 17 Jun 2026 03:20 AM IST
दुष्यंत शर्मा नितिन मिश्र, अयोध्या

सार

सूत्र बताते हैं कि एसआईटी यह भी पता लगा रही है कि इन लोगों की नियुक्ति या तैनाती किस प्रक्रिया के तहत हुई, उन्हें कौन-कौन सी जिम्मेदारियां दी गईं और उनकी कार्यप्रणाली की निगरानी किस स्तर पर की जाती थी।  
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राम मंदिर में दर्शन व्यवस्था को लेकर पूर्व में भी कुछ शिकायतें सामने आती रही हैं। - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से जुड़ी दानराशि गड़बड़ी प्रकरण की जांच में जुटी एसआईटी अब वर्ष 2021 से लेकर वर्तमान तक के पूरे रिकॉर्ड को खंगाल रही है। सूत्रों के अनुसार जांच एजेंसियों ने मंदिर परिसर और उससे जुड़ी विभिन्न व्यवस्थाओं में कार्यरत रहे लोगों का ब्योरा जुटाना शुरू कर दिया है। इसके तहत ट्रस्ट से उन कार्यकर्ताओं और कर्मचारियों की सूची भी मांगी गई है, जो पिछले वर्षों में विभिन्न व्यवस्थाओं में लगाए गए थे।

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मंदिर परिसर, दर्शन व्यवस्था, अतिथि प्रबंधन, प्रशासनिक समन्वय, सुरक्षा सहयोग और अन्य व्यवस्थाओं में करीब डेढ़ सौ लोगों को जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। इनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की भी बताई जा रही है जो अयोध्या के बाहर से आए और समय के साथ महत्वपूर्ण दायित्व संभालने लगे। सूत्र बताते हैं कि एसआईटी यह भी पता लगा रही है कि इन लोगों की नियुक्ति या तैनाती किस प्रक्रिया के तहत हुई, उन्हें कौन-कौन सी जिम्मेदारियां दी गईं और उनकी कार्यप्रणाली की निगरानी किस स्तर पर की जाती थी।  

मामले के सामने आने के बाद यह प्रश्न भी चर्चा में है कि मंदिर की विभिन्न व्यवस्थाओं में लगाए गए सभी लोगों का पर्याप्त सत्यापन और पृष्ठभूमि परीक्षण किया गया था या नहीं। एसआईटी इस पहलू की भी पड़ताल कर रही है कि संवेदनशील व्यवस्थाओं से जुड़े व्यक्तियों के चयन और निगरानी की प्रक्रिया कितनी प्रभावी थी। यदि स्क्रीनिंग और निगरानी व्यवस्था मजबूत होती तो ऐसी घटनाएं कम की जा सकती थी।
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अयोध्या के संतों की उपेक्षा हुई : धर्मदास
राम जन्मभूमि मामले के पक्षकार रहे महंत धर्मदास और तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य महाराज ने अपनी बात रखी है।

  • महंत धर्मदास ने कहा कि ट्रस्ट का अर्थ ही विश्वास होता है, लेकिन जब विश्वास समाप्त होने लगे तो स्थिति चिंताजनक हो जाती है। अयोध्या के संतों और स्थानीय लोगों की उपेक्षा हुई है। 
  • वहीं, जगद्गुरु परमहंस आचार्य महाराज ने मामले को सनातन धर्म को बदनाम करने की साजिश बताते हुए राजनीतिक आरोप लगाए।

विशेष सुविधाओं के नाम पर वसूली के आरोप भी रहे चर्चा में
राम मंदिर में दर्शन व्यवस्था को लेकर पूर्व में भी कुछ शिकायतें सामने आती रही हैं। समय-समय पर वीआईपी पास, विशेष दर्शन अथवा प्राथमिकता सुविधा दिलाने के नाम पर कथित अवैध वसूली के आरोप चर्चा में रहे हैं। 

  • हालांकि इन मामलों में आधिकारिक स्तर पर अलग-अलग समय पर स्पष्टीकरण भी दिए गए, लेकिन मौजूदा जांच के दौरान पुराने विवाद और शिकायतें भी फिर से चर्चा में आ गई हैं। 
  • सूत्रों का कहना है कि एसआईटी उन सभी पहलुओं को जोड़कर देख रही है जिनसे व्यवस्थागत कमजोरियों का संकेत मिलता हो।
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