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Ayodhya News: मलिन बस्ती में उत्सव के बीच उभरा सिसकता दर्द

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अयोध्या। भारत रत्न डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती के मौके पर उत्सव के बीच मलिन बस्ती के वाशिंदों के मन में सिसक रहा दर्द भी उभर आया। यहां रहने वाले एससी समुदाय के लोगों में दुश्वारियों से जूझने के साथ सरकारी योजनाओं के आधे अधूरे लाभ का भी मलाल है।
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डॉ. आंबेडकर की जन्म जयंती पर सोमवार को साहबगंज की मलिन बस्ती में रामपथ से ही सड़क पर चूने का छिड़काव किया गया था। बस्ती के मध्य में स्थित बाबा साहब की प्रतिमा की साफ-सफाई कर विशेष सजावट की गई। फूल मालाओं से लदी प्रतिमा के पास बड़ी संख्या में यहां पर निवास करने वाले युवा, महिला और पुरुष मौजूद मिले।

इस बीच अमर उजाला ने जब इनसे बातचीत की तो सभी के मन की बातें जुबान पर आ गईं। युवा राहुल सागर बताने लगे कि बस्ती में रहने वाले ज्यादातर उनके हमउम्र पढ़ाई करने के बाद भी बेरोजगार हैं या फिर मेहनत-मजदूरी करके आजीविका चला रहे हैं। कोई शटरिंग का काम करता है तो कोई माली का। और कुछ नहीं कर पाए तो किराये पर लेकर ई रिक्शा चलाते हैं। केंद्र और प्रदेश सरकार की विभिन्न रोजगारपरक योजनाओं के लाभ से यहां के युवा वंचित हैं।
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संगीता के अनुसार बस्ती में जिनके पास अपना मकान नहीं है, ऐसे कुछ लोगों को प्रधानमंत्री आवास मिला है। उज्जवला योजना के भी लाभार्थी हैं लेकिन कोई भी महिला स्वयं सहायता समूह की मदद से आत्मनिर्भर नहीं बन सकी हैं। इसके लिए किसी ने पहल करने के लिए प्रेरित भी नहीं किया। ज्यादातर महिलाएं गृहणी हैं और वे चाहते हुए भी परिवार के पालन-पोषण में अपने पति की मददगार नहीं बन पा रही हैं।

बस्ती के ही निवासी अमरनाथ बताते हैं कि बिजली और पानी का कनेक्शन तो बस्ती के हर घर में है लेकिन बारिश के दिनों में यहां बहुत बुरा हाल हो जाता है। हर तरफ जलभराव के बीच आवागमन में मुश्किल होती है। पानी की निकासी नहीं हो पाती है। तमाम घरों में कमर तक पानी भर जाता है। बद्री प्रसाद ने बताया कि उनके और पड़ोस में रहने वाले कई घरों का यही हाल होता है। बारिश के दिनों में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

आनंद ने बताया कि आज बाबा साहब की जयंती है तो एक दिन पहले बस्ती में सफाई की गई। सामान्य दिनों में नियमित सफाई कर्मी नहीं आते हैं। नालियां जाम रहती हैं। जल निकासी बाधित हो जाती है। सफाई कर्मी जब आते भी हैं तो नाली की सफाई करने के बाद गंदगी किनारे पर ही छोड़ देते हैं। दवा का छिड़काव न करने से मच्छरों की भरमार है। सीवर लीकेज की समस्या भी आम है। सीवर का पानी बहता रहता है। ऐसे में बदबू के बीच रहना पड़ता है।
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