अयोध्या। रामनगरी में करीब छह दशक से चली आ रही राजेंद्र निवास की प्राचीन रामलीला का इस बार स्थल बदल गया है। स्वर्गद्वार स्थित राजेंद्र निवास के सामने होने वाली रामलीला अब सरयू तट से सटे राम की पैड़ी परिसर में आयोजित की जा रही है। श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को देखते हुए आयोजन समिति ने स्थल बदलने का निर्णय लिया है। नए स्थल पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु रामलीला देखने पहुंच रहे हैं।
राम की पैड़ी परिसर में बृहस्पतिवार को श्रीसीताराम विवाह प्रसंग का मंचन किया गया। जनकपुर में माता सीता के स्वयंवर का दृश्य प्रस्तुत किया गया। स्वयंवर में आए बड़े-बड़े राजा भगवान शिव के धनुष को हिला तक नहीं सके। इससे राजा जनक चिंतित हो उठे। इसके बाद महर्षि विश्वामित्र के आदेश पर भगवान श्रीराम ने शिव धनुष भंग कर दिया। धनुष टूटते ही स्वयंवर स्थल जय श्रीराम के उद्घोष से गूंज उठा। माता सीता ने श्रीराम के गले में जयमाला डालकर उन्हें वर के रूप में स्वीकार किया।
इसके साथ ही जनकपुर में उत्सव का माहौल छा गया। कलाकारों के अभिनय ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। इससे पहले समिति के अध्यक्ष महंत वैदेही बल्लभ शरण, महंत राजीव लोचन शरण और डॉ. प्रभाकर मिश्र ने भगवान के स्वरूपों की आरती उतारी। वहीं, श्रीभगवदाचार्य स्मारक सदन की रामलीला में भी श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। यहां बृहस्पतिवार को सीता हरण की लीला का मंचन किया गया। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुति से प्रसंग को जीवंत कर दिया।