अयोध्या। रामनगरी की जीवनरेखा मानी जाने वाली सरयू नदी अब देश के प्रमुख जलमार्गों में अपनी विशेष पहचान बना रही है। भारत सरकार की ओर से घोषित राष्ट्रीय जलमार्गों की सूची में अयोध्या की सरयू नदी को 40वां स्थान प्राप्त है। इससे अयोध्या में जल परिवहन और व्यापारिक गतिविधियों के विकास की संभावनाएं मजबूत हुई हैं। वर्तमान में देश में कुल 111 राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित हैं।
इनमें वाराणसी से होकर गुजरने वाली गंगा नदी को राष्ट्रीय जलमार्ग-1 के रूप में पहला स्थान प्राप्त है। अलंकानंदा क्रूज लाइन के निदेशक विकास मालवीय के अनुसार किसी नदी या जलमार्ग को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित करने के लिए केंद्र सरकार की ओर से निर्धारित मानकों को पूरा करना आवश्यक होता है। इनमें जलमार्ग की लंबाई, पर्याप्त जल गहराई, नौवहन की क्षमता, यात्री एवं माल परिवहन की संभावनाएं, आर्थिक उपयोगिता और क्षेत्रीय संपर्क जैसे कई बिंदुओं का परीक्षण किया जाता है। इन मानकों पर खरा उतरने के बाद ही किसी नदी को राष्ट्रीय जलमार्ग घोषित किया जाता है।
निदेशक ने बताया कि घोषित 111 राष्ट्रीय जलमार्गों में से वर्तमान समय में लगभग 29 जलमार्ग माल एवं यात्री परिवहन के लिए पूरी तरह संचालित हो रहे हैं। इन जलमार्गों के माध्यम से कई राज्यों में व्यापारिक गतिविधियों और पर्यटन को नई गति मिली है। सड़क और रेल परिवहन की तुलना में जलमार्ग परिवहन कम लागत वाला और ईंधन की दृष्टि से अधिक किफायती होता है। साथ ही इससे प्रदूषण भी कम होता है। यही कारण है कि केंद्र सरकार जल परिवहन को भविष्य के महत्वपूर्ण परिवहन माध्यम के रूप में विकसित कर रही है।
ये हैं देश के सबसे प्रमुख और पुराने राष्ट्रीय जलमार्ग
- विकास मालवीय के अनुसार देश के तीन सबसे प्रमुख और पुराने राष्ट्रीय जलमार्गों में राष्ट्रीय जलमार्ग-1, राष्ट्रीय जलमार्ग-2 और राष्ट्रीय जलमार्ग-3 शामिल हैं। राष्ट्रीय जलमार्ग-1 गंगा-भागीरथी-हुगली नदी प्रणाली पर स्थित है। यह हल्दिया से प्रयागराज तक लगभग 1620 किलोमीटर लंबा है और देश का सबसे लंबा राष्ट्रीय जलमार्ग माना जाता है। राष्ट्रीय जलमार्ग-2 असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर सादिया से धुबरी तक फैला हुआ है, जिसकी लंबाई लगभग 891 किलोमीटर है। वहीं राष्ट्रीय जलमार्ग-3 केरल में कोट्टापुरम से कोल्लम तक पश्चिमी तट नहर और उद्योगमंडल-चंपकारा नहरों के हिस्से के रूप में विकसित किया गया है।