अयोध्या। अवध विश्वविद्यालय में दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें भारतीय ज्ञान परंपरा को भविष्य के प्रबंधन का आधार बताया गया। संगोष्ठी का विषय प्रबंधन में भारतीयता : भारतीय ज्ञान परंपरा का समकालीन महत्व था। तकनीकी सत्र-एक में देशभर के प्रतिभागियों ने शोधपत्र प्रस्तुत किए। इनमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, पर्यटन, सतत व्यवसाय प्रबंधन, डिजिटल विपणन और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे विषय शामिल थे।
संगोष्ठी का आयोजन विश्वविद्यालय के व्यवसाय प्रबंधन एवं उद्यमिता विभाग और श्रीराम शोधपीठ ने किया। वक्ताओं ने आधुनिक निगमित और प्रशासनिक व्यवस्था में भारतीय चिंतन, नैतिक नेतृत्व और मूल्यपरक प्रबंधन अपनाने पर जोर दिया। प्रथम चर्चा समूह की अध्यक्षता दीपा सिंह ने की। प्रो. हिमांशु शेखर सिंह और चन्द्र भूषण शास्त्री ने भारतीय ज्ञान प्रणाली को भविष्य के प्रबंधन प्रतिरूप का मार्गदर्शक बताया। दूसरी पैनल चर्चा का संचालन डॉ. महेंद्र पाल सिंह ने किया। इसमें डॉ. संजीव कुमार सिंह, प्रो. शैलेंद्र कुमार वर्मा और डॉ. राणा रोहित सिंह ने भारतीय प्रबंधन दर्शन, संगठनात्मक संस्कृति, मूल्यपरक नेतृत्व, आत्मनिर्भर भारत और भारतीय ज्ञान परंपरा की वैश्विक उपयोगिता पर अपने विचार साझा किए। धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अंशुमन पाठक ने किया।
सत्र की मॉडरेटर डॉ. अंकिता अग्रवाल रहीं, जबकि डॉ. दीपा सिंह, डॉ. रवींद्र भारद्वाज और डॉ. राम लखन सिंह ने सत्राध्यक्ष के रूप में शोधपत्रों का मूल्यांकन किया। डॉ. अनुराग तिवारी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। विशेषज्ञ समिति ने डॉ. दिवाकर मौर्य को सर्वश्रेष्ठ शोधपत्र पुरस्कार के लिए चयनित किया। संगोष्ठी के दूसरे दिन तकनीकी सत्र-द्वितीय और समापन समारोह का आयोजन होगा।