अयोध्या। पूराकलंदर थाना क्षेत्र के कंदैला गांव में मंगलवार को जमीन विवाद के चलते रामलगन मौर्य की गोली मारकर हत्या के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। ग्रामीणों और परिजनों का आरोप है कि दोनों पक्षों के बीच लंबे समय से चल रहे विवाद और बढ़ते तनाव की जानकारी पुलिस को थी। इसके बावजूद समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी। आरोप है कि घटना से महज चार दिन पहले 20 अगस्त को गांव में तैनात पुलिस पिकेट भी हटा दी गई थी।
बताया जा रहा है कि विवाद की शुरुआत करीब छह माह पहले तीन बिस्वा जमीन और रास्ते को लेकर हुई थी। दो मार्च को दोनों पक्षों के बीच खूनी संघर्ष हुआ था। मारपीट में कुछ लोग घायल हुए थे, जबकि एक गोशाला में आग लगने से दो बाइकें जल गई थीं। मामले में पुलिस ने संत कुमार मौर्य, रामसागर मौर्य, सुधाकर मौर्य और बंटी मौर्य को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। घटना के बाद गांव में पुलिस और पीएसी की तैनाती की गई थी।
तीन मार्च को वायरल हुआ था वीडियो : दो मार्च की घटना के अगले दिन तीन मार्च को मृतक पक्ष से जुड़े एक युवक ने सोशल मीडिया पर लाइव आकर वीडियो बनाया था। वीडियो में कथित तौर पर वह खुद को सम्राट खानदान का बताते हुए किसी व्यक्ति को आश्वस्त करता नजर आया था। वीडियो में कही गई बातों को लेकर दूसरे पक्ष में आपत्ति जताई गई और गांव का माहौल तनावपूर्ण होने की बात सामने आई। वीडियो सामने आने के बाद करणी सेना के राष्ट्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष सनी सिंह ने भी आपत्ति जताते हुए गांव पहुंचकर पुलिसकर्मियों के सामने मामले का संज्ञान लेने और कार्रवाई की मांग की थी।
जुलाई में फिर बढ़ा विवाद : विवाद के दौरान दूसरे पक्ष से जुड़े सूर्यभान सिंह गंभीर रूप से घायल हुए थे। उपचार के दौरान 19 जुलाई को उनकी मौत हो गई। इसके बाद तनाव और बढ़ गया। 26 जुलाई को सूर्यभान सिंह की तेरहवीं का सामान लेकर लौट रहे विजय भान सिंह उर्फ डब्बू सिंह ने बरवा गांव के पास गोली चलाए जाने का आरोप लगाया। विजय भान की तहरीर पर पूराकलंदर पुलिस ने राम सिंगार मौर्य, रामलगन मौर्य समेत चार लोगों के खिलाफ जानलेवा हमले की रिपोर्ट दर्ज की। पुलिस ने सभी तथ्यों की जांच के बाद कार्रवाई की बात कही थी।