राष्ट्रीय सत्संग प्रतियोगिता में मंचस्थ मुख्य अतिथि आलोक कुमार व अन्य।
अयोध्या। पूरी दुनिया में हनुमान चालीसा 500 करोड़ बार देखा गया। आज भी 60% लोग धार्मिक आस्था रखते हैं। हमारी परंपरा में मीरा, तुलसी, कबीर, नानक, आदि सभी भक्त कवि संगीतज्ञ रहे हैं। कभी भी करें, कहीं भी करें, कैसे भी करें, हमें प्रभु स्मरण की स्वतंत्रता है। वो चाहे किसी मत,पंथ, संप्रदाय,जाति, परंपरा के मानने वाले हों, सभी को इसकी स्वतंत्रता है।
ये विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह कार्यवाह आलोक कुमार ने कहीं। वह श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र में आयोजित राष्ट्रीय सत्संग प्रतियोगिता के समापन सत्र को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर राम मंदिर के ट्रस्टी डॉ़ अनिल मिश्र ने कहा कि सत्संग और भक्ति के माध्यम से समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।
प्रतियोगिता में भाग लेने देश भर के 22 प्रांतों (संभागों) से सत्संग मंडलियां के करीब 600 प्रतिभागी एवं समिति सदस्य अयोध्या पहुंचे हैं। शनिवार को प्रतियोगिताएं का क्रम पूरे दिन चलता रहा। नेपाल राष्ट्र से आई 11 सदस्यीय टोली ने भी अपनी प्रस्तुति दी। प्रतियोगिता का परिणाम देर रात में घोषित किया गया। समापन अवसर पर उमाशंकर मिश्र, संजय मालवीय, अमरेंद्र विष्णुपरी, रामचंद्र जायसवाल, सहित सत्संग समिति के अन्य पदाधिकारी व कार्यकर्ता मौजूद रहे।