40-अंगद टीला परिसर में महानाट्य समारोह का उद्घाटन करते राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय व अ
अयोध्या। नारी सशक्तीकरण, सुशासन और लोककल्याण की प्रतीक माता अहिल्याबाई होल्कर के जीवन पर आधारित महानाट्य “कर्मयोगिनी माता अहिल्या” की भव्य एवं प्रेरणादायी प्रस्तुति ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया। ऐतिहासिक कथानक, सशक्त संवाद और प्रभावशाली मंच सज्जा के माध्यम से यह महानाट्य न केवल मनोरंजन, बल्कि कर्तव्य, त्याग और सेवा का गहन संदेश भी देता नजर आया।
भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के स्वायत्त संगठन सांस्कृतिक स्रोत एवं प्रशिक्षण केंद्र (सीसीआरटी) की ओर से महान शासिका, लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की 300वीं जयंती पर प्रेरणादायी महानाट्य प्रस्तुति का आयोजन अंगद टीला परिसर में शनिवार को हुआ। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय व डॉ. अनिल मिश्र ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। महानाट्य में माता अहिल्याबाई के संघर्षपूर्ण जीवन, उनके न्यायप्रिय शासन, धर्मपरायणता और जनकल्याणकारी निर्णयों को प्रभावी ढंग से मंच पर उतारा गया। कलाकारों के जीवंत अभिनय, पारंपरिक वेशभूषा और पृष्ठभूमि में गूंजते संवादों ने दर्शकों को उस युग में ले जाने का अनुभव कराया, जहां कर्तव्य को ही धर्म माना जाता था।
चंपत राय ने माता अहिल्याबाई होल्कर को नमन करते हुए कहा कि माता अहिल्याबाई होल्कर कर्म, करुणा और कर्तव्य की जीवंत प्रतिमूर्ति थीं। उन्होंने अपने शासन से यह सिद्ध किया कि सुशासन सेवा भाव से चलता है, सत्ता से नहीं। उनका जीवन आज भी समाज और राष्ट्र को न्याय, धर्म और जनकल्याण के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। कार्यक्रम में रामकथा संग्रहालय के निदेशक डॉ. सजीव सिंह, विहिप के केंद्रीय मंत्री राजेंद्र सिंह पंकज, डॉ. चंद्रगोपाल पांडेय, सीसीआरटी, नई दिल्ली के अध्यक्ष डॉ. विनोद नारायण इंदुरकर, उपनिदेशक आशुतोष, भगवान वर्मा, डॉ. जुलेशा सिद्धार्थ सहित अन्य मौजूद रहे।