अयोध्या। परिषदीय विद्यालयों में ड्रॉपआउट दर कम करने और स्कूल छोड़ चुके बच्चों को दोबारा शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए विशेष अभियान शुरू किया गया था। शिक्षा विभाग के जरिए नियुक्त किए गए स्पेशल वाॅलंटियर ने पिछले कई महीनों से मानदेय न मिलने के कारण काम से दूरी बना ली है, जिससे स्कूल छोड़ चुके बच्चों को वापस बुलाने की प्रक्रिया लगभग ठप पड़ गई है।
विभाग ने परिषदीय विद्यालयों में ड्रॉपआउट छात्रों को फिर से विद्यालय से जोड़ने के लिए 27 विद्यालयों में स्पेशल वाॅलंटियर की नियुक्ति की थी। इनकी जिम्मेदारी उन विद्यार्थियों को चिह्नित करना और उनके परिवारों से संपर्क कर उन्हें दोबारा स्कूल आने के लिए प्रेरित करना था, जिन्होंने किसी कारण वश पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी। इसके अलावा ऐसे बच्चों को भी चिह्नित करना था, जो कभी स्कूल नहीं गए थे। सत्र 2025-26 में स्कूल छोड़ चुके बच्चों को वापस बुलाने के लिए विशेष प्रयास किए गए थे। जिन विद्यालयों से पांच या उससे अधिक बच्चों ने पढ़ाई छोड़ दी थी, वहां स्पेशल वाॅलंटियर के माध्यम से घर-घर जाकर संपर्क करने और अभिभावकों को समझाने का प्रयास किया गया। पांच माह से अधिक मानदेय भुगतान न होने के कारण कई वाॅलंटियर ने विद्यालय जाना बंद कर दिया, जिससे बच्चों को प्रेरित करने और उनके घर-घर जाकर संपर्क करने का कार्य प्रभावित हो गया। प्रत्येक स्पेशल वाॅलंटियर को प्रति माह लगभग 4000 रुपये मानदेय दिए जाने थे। बीएसए लालचंद्र ने बताया कि कुछ तकनीकी समस्या के कारण भुगतान नहीं हो पाया रहा है। मानदेय भुगतान की प्रक्रिया चल रही है और जल्द ही वाॅलंटियर को भुगतान कर दिया जाएगा।