13- राम जन्मभूमि परिसर का दृश्य- फाइल फोटो
अयोध्या। राम जन्मभूमि परिसर के अन्य मंदिरों में दर्शन-व्यवस्था शुरू होने से पहले राम मंदिर ट्रस्ट भीड़ प्रबंधन को लेकर तकनीकी स्तर पर मंथन कर रहा है। ट्रस्ट के आकलन के मुताबिक जैसे ही परिसर के अन्य मंदिरों में नियमित दर्शन प्रारंभ होंगे, भीड़ का दायरा लगभग तीन किलोमीटर तक बढ़ सकता है। इसी को देखते हुए प्रवेश-निकासी मार्ग, रेलिंग/बैरिकेडिंग और डायवर्जन प्लान को नए सिरे से डिजाइन किया जा रहा है।
फरवरी से राम मंदिर के अन्य मंदिरों में दर्शन शुरू करने की योजना बन रही है। इनमें परकोटा के छह मंदिर भगवान शिव, सूर्य, गणेश, हनुमान, माता भगवती, माता अन्नपूर्णा के अलावा शेषावतार व सप्त मंडपम के सात मंदिर शामिल हैं। इन सभी मंदिरों में श्रद्धालुओं को दर्शन शुरू करने से पहले राम मंदिर ट्रस्ट पूरा होमवर्क करने में जुटा हुआ है। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए ट्रस्ट की योजना मुख्य प्रवेश द्वारों पर स्थायी रेलिंग लगाने की है। इसका उद्देश्य भीड़ को संकरी नियंत्रित प्रवेश धारा में लाकर धक्का-मुक्की की स्थिति से बचाना है। इससे श्रद्धालुओं का प्रवाह एक दिशा में बना रहेगा।
तकनीकी रूप से सबसे बड़ी चुनौती दोहरा प्रवाह माना जा रहा है। एक तरफ रामलला दर्शन की मुख्य भीड़, दूसरी तरफ परिसर के अन्य मंदिरों में दर्शन के लिए नया प्रवाह। इसी वजह से एंट्री-एग्जिट को अलग रखने, वन-वे मूवमेंट और क्रॉस-फ्लो रोकने जैसे उपायों पर भी प्लान तैयार हो रहा है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा, दर्शन की गति और व्यवस्था में अनुशासन ट्रस्ट का लक्ष्य है। राम मंदिर के ट्रस्टी डॉक्टर अनिल मिश्र ने बताया कि 28 व 29 जनवरी को होने वाली निर्माण समिति की बैठक में इस पर चर्चा की जाएगी।