अयोध्या। टांडा थर्मल प्रोजेक्ट के इंजीनियर को उनके सरकारी काम में बाधा पहुंचाने, गाली-गलौज करते हुए जान से मारने की धमकी देने के मामले में आरोपी कल्पनाथ को 43 साल बाद मुकदमे से मुक्ति मिल गई। सबूत के अभाव में कोर्ट ने बरी कर दिया। यह फैसला न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वितीय प्रद्युम्न सिंह ने शुक्रवार को सुनाया है।
अभियोजन के अनुसार घटना थाना इब्राहिम पुर क्षेत्र स्थित थर्मल प्रोजेक्ट के एक कार्यालय की वर्ष 1983 की है। 26 अगस्त को शाम के 5:15 बजे थर्मल प्रोजेक्ट के इंजीनियर विजय कुमार व राधेश्याम मंडल अपने कार्यालय में सरकारी काम कर रहे थे। तभी इतरत अली उर्फ इशरत अली व कल्पनाथ विश्वकर्मा ने कार्यालय में आकर सरकारी काम में अवरोध पैदा किया और कार्यालय के अंदर मिर्च जला दिया जिससे सांस लेने में दिक्कत होने लगी। गाली-गलौज करते हुए मारपीट की और अपमानित करते हुए जान से मारने की धमकी दी गई। घटना की रिपोर्ट दूसरे दिन थाना इब्राहिम पुर में विजय कुमार ने दर्ज कराई। न्यायालय में आरोप पत्र आने के बाद इतरत अली व कल्पनाथ विश्वकर्मा के खिलाफ आरोप बनाया गया।
आरोपी इतरत अली उर्फ इशरत अली की पत्रावली अलग करते हुए कल्पनाथ विश्वकर्मा के मामले में विचारण शुरू किया गया। वादी मुकदमा को अदालत में गवाही देने के लिए कई बार अवसर प्रदान किया गया लेकिन कोई गवाह कोर्ट में हाजिर नहीं हुआ। अदालत ने 15 मई को गवाह परीक्षित कराए जाने का अवसर समाप्त कर दिया। अदालत ने 43 साल पुराने लंबित वाद होने एवं 31 साल से कोई गवाह न आने के आधार पर आरोपी कल्पनाथ विश्वकर्मा को सबूत के अभाव में बरी कर दिया।