अयोध्या। आस्था की नगरी अयोध्या में रंगभरी एकादशी एक पर्व नहीं, बल्कि भक्ति और उल्लास का विराट उत्सव बनकर उतरी। प्रभु के अनन्य भक्तों ने जब हनुमानगढ़ी में विराजमान हनुमंतलला के चरणों में अबीर-गुलाल अर्पित किया तो मानो पूरे नगर ने उसी क्षण रंगों की चादर ओढ़ ली। मंगल ध्वनि, घंटे-घड़ियाल और जयघोष के बीच साधु-संतों ने अपने आराध्य के संग होली खेलकर रंगोत्सव की मुनादी की।
गुलाल के उड़ते बादलों में भक्ति का भाव ऐसा घुला कि हर चेहरा रामनाम के रंग में रंगा दिखाई दिया। हनुमानगढ़ी में सुबह नौ बजे विधिवत पूजन-अर्चन व शृंगार करने के बाद हनुमंतलला को अबीर-गुलाल लगाया गया। गद्दीनशीन महंत प्रेमदास व संकट मोचन सेना के अध्यक्ष महंत संजय दास के सानिध्य में हनुमान जी के निशान व छड़ी की पूजा-आरती की गई। इस दौरान श्रद्धालु भी आराध्य की भक्ति में लीन नजर आए। उसके बाद नागा साधुओं की टोली सड़कों पर निकली। रास्ते में जो मिला उसे अबीर गुलाल लगाया। लोग हनुमान जी का प्रसाद समझकर आनंदित होते रहे।
इसके बाद शोभायात्रा सरयू तट पहुंची। यहां साधुओं ने पूजन-अर्चन व स्नान के बाद मंदिरों की ओर रुख किया। नागा साधु संतों ने मठ-मंदिरों में जाकर विराजमान विग्रह को अबीर-गुलाल लगाते हुए होली का निमंत्रण दिया। हनुमानगढ़ी से निकला भव्य जुलूस श्रद्धा और परंपरा का चलता-फिरता उत्सव बन गया। आगे-आगे हनुमानगढ़ी के निशान, पीछे भजन-कीर्तन की स्वर लहरियां और बीच में आस्था से झूमते नागा साधु, यह दृश्य हर किसी को आनंदित कर रहा था। नागा साधुओं ने सड़कों पर अद्भुत करतब दिखाए। पंचकोसी परिक्रमा के साथ शोभायात्रा का समापन हुआ। जुलूस में अनी के महंत मुरलीदास, महंत सत्यदेव दास, मुख्य पुजारी रमेश दास, महंत हेमंत दास, पहलवान राजेश दास, पहलवान मनीराम दास, पुजारी दिगपाल दास, डॉ़ देवेशाचार्य सहित सैकड़ों की संख्या में नागा-साधु शामिल रहे।
आठ हजार मंदिरों को दिया होली का आमंत्रण
रंगों से सराबोर यह शोभायात्रा जब पंचकोसी परिक्रमा मार्ग की ओर बढ़ी, तो मार्ग के दोनों ओर खड़े श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर स्वागत किया। इससे पहले नागा साधुओं का दल राम नगरी के विभिन्न मठ-मंदिरों में पहुंचा। आठ हजार मंदिरों को होली का आमंत्रण दिया गया। शुक्रवार से होली का रंग मठ-मंदिरों से निकलकर अब रामनगरी की गलियों में बरसने लगा है। सर्वप्रथम राजगोपाल मंदिर इसके बाद तिवारी मंदिर में महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी, तुलसीदास की छावनी में महंत जनार्दन दास, मणिरामदास की छावनी में महंत कमल नयन दास, जानकीघाट बड़ास्थान में महंत जन्मेजय शरण, तपस्वी छावनी पर जगद्गुरु परमहंसाचार्य ने नागा-साधुओं का अभिनंदन किया।
30-हनुमानगढ़ी में रंग भरी एकादशी पर चिंह की आरती के बाद चिंह पर गुलाल अर्पित करते संत।-नितिन श्
30-हनुमानगढ़ी में रंग भरी एकादशी पर चिंह की आरती के बाद चिंह पर गुलाल अर्पित करते संत।-नितिन श्
30-हनुमानगढ़ी में रंग भरी एकादशी पर चिंह की आरती के बाद चिंह पर गुलाल अर्पित करते संत।-नितिन श्