अयोध्या। जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों में से पांच तीर्थंकरों का जन्म अयोध्या में हुआ है। यहां से सिर्फ 28 किमी दूर रौनाही के रत्नपुरी तीर्थ में 15वें जैन तीर्थंकर भगवान धर्मनाथ का जन्म स्थान है। 75 साल पहले 1950 में रत्नपुरी तीर्थ पर भगवान धर्मनाथ की प्रतिमा विराजमान की गई। इस प्रतिमा का मंगलवार को सर्वोच्च जैन साध्वी गणिनी प्रमुख ज्ञानमती की प्रेरणा से हीरक जयंती उत्सव धूमधाम के साथ मनाया गया।
पीठाधीश रवींद्र कीर्ति स्वामी ने बताया कि भक्तों ने मंदिर में भगवान धर्मनाथ का पंचामृत अभिषेक करके पुण्य कमाया। भगवान को जल, दूध, दही, सर्वोषधि, केशर, नारियल रस व इक्षुरस अर्पित किया। भगवान का पूजन करते हुए फलों से लदे 75 अर्घ्य थाल भी समर्पित किए। भक्तों को संबोधित करते हुए गणिनी प्रमुख ने कहा कि जब 1950 में भगवान धर्मनाथ की यह प्रतिमा विराजमान हुई थी, तब वह 16 वर्ष की उम्र में अपने माता व पिता के साथ मौजूद थीं। कार्यक्रम में समिति के मंत्री डॉ. जीवन प्रकाश जैन, परमेंंद्र जैन, निधेश जैन व राजू जैन समेत अन्य भक्त मौजूद रहे।