अयोध्या। मेडिकल कॉलेज से चोरी हुए रीजेंट्स कुछ ही प्रयोगशालाओं में इस्तेमाल हो सकते हैं। जिस मशीन में ये रीजेंट्स लगते हैं, वो हर जगह उपलब्ध नहीं है। हालांकि प्रदेश के कई अस्पतालों में जांच करने वाली एक कंपनी के पास इस तरह की सर्वाधिक मशीनें हैं। ऐसे में आशंका है कि चोरी हुए रीजेंट्स की आपूर्ति जिले से बाहर हुई होगी।
मेडिकल कॉलेज के सूत्रों के अनुसार चोरी हुए रीजेंट्स खून की कंप्लीट ब्लड काउंट (सीबीसी) जांच और शुगर की एचबीए-1सी जांच के हैं। ये रीजेंट्स डी-10 बॉयोरेड नामक मशीन में लगते हैं, जिसकी कीमत लगभग 10 लाख रुपये बताई जाती है। ये मशीन बड़े सरकारी अस्पतालों में एक निजी कंपनी की ओर से पीपीपी मोड पर लगाई गई है। वहीं कई बड़ी प्रयोगशालाओं में इसे स्थापित किया गया है।
ऐसे में रीजेंट्स चोरी होने के बाद इसे बाहर की लैबों में बेचने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। आशंका है कि अस्पतालों में पीपीपी मोड पर चलने वाली निजी कंपनी की लैब में भी इसे खपाया गया हो। कॉलेज की जांच कमेटी के समक्ष आरोपियों ने इस आशंका पर मुहर लगाई थी, जिसमें उन्होंने लखनऊ के नंबर की एक गाड़ी पर सामान लदवाने का दावा किया था।
इसमें एक निजी कंपनी के कर्मचारी का नाम सामने आया था। व्यापक स्तर पर हुए इस खेल की उच्च स्तरीय जांच व लैब के स्टॉक की आंतरिक ऑडिट की सिफारिश जांच कमेटी ने की है, लेकिन अभी केस तक नहीं दर्ज हो सका है।