अयोध्या। श्रीराम मंदिर के आसपास 500 बेड के हॉस्पिटल के लिए जगह नहीं मिल सकी है। इस वजह से आधुनिक सुविधाओं से युक्त सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल बनाने का सपना धरा रह गया है। वहीं, राजकीय श्रीराम अस्पताल को भी हाईटेक करने की योजना भी फेल हो गई है।
श्रीराम मंदिर निर्माण के बाद जिले में रोज एक लाख श्रद्धालुओं के पहुंचने का दावा किया गया था। इस लिहाज से मंदिर के पास ही बेहतर चिकित्सीय सेवाएं मुहैया कराने के लिए 500 बेड के सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल बनाने के निर्देश दिए गए थे। प्रमुख सचिव स्वास्थ्य पार्थ सारथी सेन शर्मा ने भी 17 दिसंबर 2023 को जिले का दौरा करके अस्पताल के लिए जमीन खोजने के निर्देश दिए थे।
मंदिर से सटे राजकीय श्रीराम अस्पताल का निरीक्षण करके उन्होंने खाली पड़ी जगह मा नापजोख कराई। इसके बगल स्थित जलकल की जमीन की भी पैमाइश कराई गई। श्रीराम अस्पताल में पर्याप्त जगह न होने से इसे उच्चीकृत करने की योजना बनाई गई, लेकिन समय के साथ-साथ सारे दावों की हवा निकल गई है। अब तक सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल के लिए प्रशासन जमीन नहीं खोज सका ना ही श्रीराम अस्पताल को उच्चीकृत किया जा सका। बल्कि पहले की तरह तमाम दुश्वारियां झेलकर मरीज इलाज कराने को विवश हैं।
आए दिन श्रद्धालुओं को होती है दिक्कत, श्रीराम अस्पताल से होते हैं रेफर
देश के कोने-कोने से रामलला का दर्शन करने पहुंचे श्रद्धालुओं को आए दिन तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। हर दूसरे-तीसरे दिन हार्ट अटैक समेत अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीज यहां पहुंचते हैं तो उन्हें तत्काल रेफर कर दिया जाता है। हायर सेंटर तक पहुंचते-पहुंचते उनकी जान चली जाती है। जिले के लिए अति आवश्यक हो चुकी इस महत्वपूर्ण सेवा को शुरू करने के लिए अब शायद जिम्मेदार गंभीर नहीं हैं।
श्रीराम अस्पताल परिसर की खाली भूमि की माप कराई गई तो पर्याप्त जगह नहीं मिली थी। दूसरी जगह अस्पताल के लिए भूमि खोजी जा रही थी, लेकिन उसके बाद कोई जानकारी नहीं मिली है।
- डॉ. सुशील प्रकाश, अपर निदेशक