अयोध्या। मुंबई में खेतों में साग-सब्जी की खेती करने जा रहे सात नाबालिग बच्चों को आरपीएफ ने अयोध्या कैंट रेलवे स्टेशन पर रेस्क्यू किया। 11 से 17 वर्ष की उम्र के ये बच्चे 27 अक्तूबर को प्लेटफार्म नंबर एक पर मिले थे। पूछताछ में उन्होंने बताया कि एक व्यक्ति उन्हें मुंबई ले जाने के लिए लाया था, लेकिन स्टेशन पर बैठाकर चला गया। बच्चों को उस व्यक्ति के नाम और पते की जानकारी नहीं थी। उन्हें हर महीने 10 हजार रुपये मजदूरी देने की बात कही गई थी।
आरपीएफ प्रभारी निरीक्षक हरीश कुमार शाही ने बताया कि 27 अक्तूबर को एएसआई रमेश कुमार यादव और कांस्टेबल अमित कुमार स्टेशन पर गश्त और चेकिंग कर रहे थे। इसी दौरान सातों बच्चे लावारिस हालत में मिले। बच्चों को थाने लाकर सुरक्षित रखा गया और बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) व एंटी ह्यूमन ट्रैफिकिंग यूनिट (एएचटीयू) को सूचना दी गई।
28 अक्तूबर को एएसआई धर्मेंद्र प्रताप सिंह और अन्य कर्मचारियों की मौजूदगी में बच्चों से पूछताछ की गई। इस दौरान उनके माता-पिता भी पहुंचे। उन्होंने बताया कि वे अपनी मर्जी से बच्चों को खेतों में काम करने के लिए मुंबई भेज रहे थे। सभी बच्चों को बाल कल्याण समिति के सामने पेश किया गया। समिति ने वैधानिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद बच्चों को उनके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया।