विश्व धरोहर दिवस पर विश्वविद्यालय में आयोजित संगोष्ठी में मौजूद लोग।
अयोध्या। डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के व्यवसाय प्रबंधन एवं उद्यमिता विभाग ने विश्व धरोहर दिवस पर संगोष्ठी का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण और उनके महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई। संगोष्ठी का उद्देश्य विद्यार्थियों को धरोहरों के प्रति जागरूक करना और उनके आर्थिक व पर्यटन महत्व को समझाना था।
मुख्य वक्ता पूर्व विभागाध्यक्ष व डीन प्रो. आर. एन. राय ने कहा कि विश्व धरोहर हमारी पहचान और इतिहास का अमूल्य हिस्सा है। इसे संरक्षित करना हम सभी की जिम्मेदारी है। प्रो. राय ने अयोध्या के धरोहर स्थलों का विशेष उल्लेख किया और छात्रों से उनके संरक्षण के लिए प्रयास करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि यदि यह स्थल संरक्षित नहीं रहेंगे तो पर्यटक क्या देखने आएंगे और हमारी विरासत भी सुरक्षित नहीं रह पाएगी। भारत में पर्यटन के लिए प्रचुर विकल्प हैं, जिनमें हेरिटेज और प्राकृतिक पर्यटन के अवसर शामिल हैं।
विशिष्ट वक्ता प्रो. हिमांशु शेखर सिंह ने धरोहरों के आर्थिक और पर्यटन महत्व पर प्रकाश डाला। कहा कि इनके संरक्षण से स्थानीय विकास और रोजगार के अवसर बढ़ते हैं। पर्यटन उद्योग देश को विकासशील बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे रहा है।
विभागाध्यक्ष प्रो. शैलेन्द्र कुमार वर्मा ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि विश्व धरोहर दिवस हमें अपनी संस्कृति और परंपराओं को सहेजने का संदेश देता है। उन्होंने छात्रों को इस दिशा में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया। इस मौके पर कार्यक्रम के संयोजक डॉ. महेन्द्र पाल सिंह, डॉ. राकेश कुमार, डाॅ. राणा रोहित सिंह, डॉ. आशुतोष पांडेय, डॉ. अंशुमान पाठक, डॉ. रविंद्र भारद्वाज सहित कई लोग माैजूद रहे।