अयोध्या। राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद ट्रस्ट और भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने चढ़ावा गणना व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया है। पहले चरण में 23 कर्मियों के हटने के बाद कार्यरत बचे 13 कर्मियों को भी अब सेवामुक्त कर दिया गया है। इसके साथ ही चढ़ावा गणना से जुड़े पुराने सभी 36 कर्मियों की भूमिका पूरी तरह समाप्त हो गई है। नई व्यवस्था के तहत अब गणना का पूरा दायित्व एसबीआई की ओर से तैनात नए स्टाफ के हाथों में होगा।
सूत्रों के अनुसार, वाराणसी की निजी एजेंसी के माध्यम से हाउसकीपिंग कर्मी के रूप में नियुक्त कर्मचारियों को अचानक बुलाकर उनके आई-कार्ड और ड्रेस जमा करा लिए गए तथा अगले दिन से ड्यूटी पर नहीं आने के निर्देश दे दिए गए। बैंक ने विभिन्न शाखाओं से अपने नियमित कर्मचारियों की तैनाती की है, ताकि पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से संचालित हो सके। चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद हाउसकीपिंग कर्मियों से नकदी की गणना कराए जाने पर भी सवाल उठे थे। इसके बाद बैंक और ट्रस्ट ने व्यवस्था में व्यापक बदलाव किया है। हटाए गए कर्मियों को मंदिर परिसर में किसी अन्य कार्य में भी नहीं लगाया जाएगा।
उधर, हटाए गए कर्मचारियों का आरोप है कि निजी एजेंसी को प्रति कर्मचारी लगभग 26 हजार रुपये का भुगतान किया जाता था, जबकि उन्हें करीब 15 हजार रुपये वेतन मिलता था। कर्मचारियों का कहना है कि बिना किसी व्यक्तिगत गलती के उन्हें अचानक सेवा से हटा दिया गया। हालांकि, ट्रस्ट और एसबीआई ने बयान जारी नहीं किया गया है।