अयोध्या। गोली लगने से घायल हुआ गैंगस्टर संजय सिंह की नब्बे के दशक से ही अयोध्या समेत आसपास के जिलों में भी तूती बोलती थी। वह उसी समय से अपराध जगत का चर्चित चेहरा बन गया था। उसके खिलाफ हत्या, जानलेवा हमला, लूट, बलवा, मारपीट आदि से संबंधित 29 केस दर्ज हैं।
मूलरूप से मिल्कीपुर के ईंटगांव निवासी गैंगस्टर संजय सिंह ने नब्बे के दशक में अपराध जगत में कदम रखा था। संजय के पिता स्व. दिनेश सिंह बिहार में एक कंपनी में काम करते थे। उनके सेवानिवृत्त होने के बाद वह परिवार सहित पैतृक गांव में रहने लगे। उसी समय संजय की संगति आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों के साथ हुई। वह महराजगंज क्षेत्र निवासी संजय उर्फ गुल्लू के संपर्क में आया। इसी वर्ष उसने अपराध की दुनिया में एंट्री की और इनायत नगर थाने में उसके खिलाफ धमकी का मामला दर्ज हुआ।
1992 में उसके खिलाफ इनायतनगर थाने में जानलेवा हमला, लूट, बलवा, मारपीट, जान से मारने की धमकी के दो मामले दर्ज किए गए। 1996 में उसके खिलाफ जानलेवा हमला व गुंडा एक्ट की रिपोर्ट दर्ज हुई। 1997 में खंडासा थाने में जानलेवा हमला, साजिश और इनायत नगर थाने में यूपी गैंगस्टर एक्ट की रिपोर्ट दर्ज हुई। वर्ष 2002 में उसके खिलाफ नगर कोतवाली में हत्या का पहला मामला दर्ज किया गया। इसके बाद 2009 में पूराकलंदर क्षेत्र में हुए दोहरे हत्याकांड में उसका नाम चर्चा में आया। इस मामले में एक सिपाही की भी हत्या हुई थी।
इसके बाद से ही उसका रसूख अपराध जगत में बढ़ता गया। जिले के ठेके-पट्टों में संजय सिंह का दखल बढ़ा। बाद में जिले के बड़े माफियाओं का संरक्षण भी मिलने लगा। अपराध की इसी रफ्तार के कारण वर्तमान में संजय सिंह के खिलाफ हत्या, लूट, डकैती, साजिश, जानलेवा हमला समेत 29 मामले दर्ज हैं। वह थाना इनायतनगर का हिस्ट्रीशीटर है और इस समय जमानत पर है।
पंचायत चुनाव से ही अपराध से कर लिया था किनारा
वर्ष 2015 में हुए पंचायत चुनाव में गैंगस्टर संजय सिंह ने राजनीति में एंट्री की। हैरिंग्टनगंज ब्लॉक की सीट से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव लड़ा। वर्ष 2021 में हुए चुनाव में उन्होंने मिल्कीपुर चतुर्थ सीट से दांव आजमाया, लेकिन इस बार भी हार का सामना करना पड़ा। इसी के बाद से उसने अपराध की मुख्य धारा से किनारा कसना शुरू किया।
वर्ष 2009 में ही इनामी घोषित हुआ था
गैंगस्टर संजय सिंह वर्ष 2009 में ही इनामी घोषित हुआ था। लंबे समय से फरार होने के कारण उस पर इनायतनगर पुलिस ने 10 हजार रुपये का इनाम रखा था। वर्ष 2011 तक वह लगातार फरार रहा और 2012 में जेल में बंद हुआ। इसके बाद वह जेल से बाहर भी रहा तो हिस्ट्रीशीटर होने के कारण पुलिस उसकी निगरानी करती रही।