अयोध्या। नीट-यूजी परीक्षा रद्द होने के बाद जहां लाखों छात्र नई परीक्षा तिथि का इंतजार कर रहे हैं, इसी बीच सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टेलीग्राम पर साइबर ठगी का नया खेल शुरू हो गया है। कुछ फर्जी चैनलों ने पेपर बेचने के नाम पर छात्रों से भारी रकम वसूलने की कोशिश शुरू कर दी है। इनमें दावा किया जा रहा है कि परीक्षा का असली पेपर पहले ही उपलब्ध कराया जाएगा। फिलहाल एनटीए ने री-नीट की नई परीक्षा तिथि घोषित नहीं की है।
टेलीग्राम पर रेयर ओरिजिनल एक चैनल में (हाउ टू बाय री-नीट 2026 पेपर?) नाम से पोस्ट डाली गई है। इसमें कहा गया है कि जो छात्र 80 हजार रुपये देंगे, उन्हें परीक्षा का पेपर दिया जाएगा। पोस्ट में यह भी दावा किया गया है कि पैसे देने के बाद छात्रों को एक प्राइवेट चैनल का लिंक मिलेगा, जहां परीक्षा से कुछ दिन पहले प्रश्नपत्र भेजा जाएगा।
चैनल पर पुराने स्क्रीनशॉट और कुछ कथित प्रूफ भी शेयर किए जा रहे हैं, जिससे छात्रों का भरोसा जीता जा सके। साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि टेलीग्राम पर कई लोग पेपर बेचने का दावा कर रहे हैं, लेकिन सही पेपर सिर्फ उनके पास है। इस तरह के दावों से छात्र भ्रम में पड़ रहे हैं।
अयोध्या के विद्यार्थी कौशलेंद्र सिंह ने बताया कि शुरुआत में उन्हें यह चैनल असली लगा था। उन्होंने कहा, चैनल पर लगातार पुराने स्क्रीनशॉट और रिजल्ट डाले जा रहे थे। एडमिन कह रहा था कि 80 हजार रुपये जमा करने पर परीक्षा से पांच दिन पहले पेपर मिल जाएगा। एक बार मैंने 30 हजार पेमेंट करने का सोच लिया था। बाद में समझ आया कि यह छात्रों को फंसाने का तरीका हो सकता है। मैंने कोई भुगतान नहीं किया।
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पैसे लेकर गायब हो जाते हैं साइबर ठग
साइबर जानकारों अनुसार, परीक्षा के समय इस तरह के फर्जी चैनल तेजी से बढ़ जाते हैं। ये पहले छात्रों का भरोसा जीतते हैं और फिर पैसे लेकर गायब हो जाते हैं या फर्जी पेपर भेज देते हैं। साइबर थाना प्रभारी अरशद ने बताया कि नीट परीक्षा से जुड़ी किसी भी पेपर बिक्री की सूचना पूरी तरह फर्जी होती है। ऐसे टेलीग्राम चैनलों पर भरोसा न करें और किसी को भी पैसे न भेजें। यदि कोई संदिग्ध गतिविधि दिखे तो तुरंत साइबर पुलिस को सूचना दें।
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छात्रों को क्या नहीं करना चाहिए
किसी भी टेलीग्राम व्हाट्सएप चैनल पर पेपर लीक या गारंटी चयन के दावे पर भरोसा न करें।
किसी अनजान व्यक्ति या ग्रुप को पैसे न भेजें।
केवल एनटीए की आधिकारिक वेबसाइट की सूचना पर ही विश्वास करें।
संदिग्ध लिंक या चैनल की जानकारी तुरंत साइबर पुलिस को दें।