अयोध्या। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने रविवार को अयोध्या से गो प्रतिष्ठा आंदोलन की शुरुआत की। रामकोट की परिक्रमा करने के बाद चारुशिला मंदिर में गो ध्वज स्थापित किया। शंकराचार्य इस दौरान राम मंदिर के दर्शन करने नहीं पहुंचे। उन्होंने कहा कि रामलला की प्राण प्रतिष्ठा तभी पूर्ण मानी जाएगी जब गो माता की प्रतिष्ठा होगी। गो हत्या को मानव हत्या जैसा दंडनीय अपराध घोषित किया जाए।
कहा कि हमने प्रण लिया है कि जब तक राममंदिर का पूर्ण निर्माण नहीं हो जाता, तब तक दर्शन नहीं करेंगे। मंदिर के पूर्ण निर्माण के बाद राष्ट्रमाता के दूध से भरा सोने का कटोरा लेकर रामलला के दर्शन करने जाएंगे। कहा कि अभी मंदिर का निर्माण पूरा नहीं हुआ है, मंदिर जाने से पहले सबसे पहले ध्वज का दर्शन करना होता है। अभी ध्वज दर्शन के लिए उपलब्ध नहीं है, कलश दर्शन के लिए उपलब्ध नहीं है। वहां जाकर क्या दर्शन करेंगे। शंकराचार्य ने संतों की टोली के साथ क्षीरेश्वरनाथ पर पूजा की और रामकोट की परिक्रमा की। इस दौरान जगद्गुरु परमहंसाचार्य, महंत धर्मदास, महंत दिलीप दास, महंत राम प्रकाश दास, संतोष दुबे, मनीष पांडेय आदि मौजूद रहे।
हमें एंटी मोदी कहा जाता है, हमारी पीड़ा नहीं पूछते
शंकराचार्य ने कहा कि हमें एंटी मोदी कहा जाता है। हमारी पीड़ा नहीं पूछते हैं। कहा कि ताजा मामला देख लें। हम जब गोरक्षा की बात को लेकर देश के सभी राज्यों की राजधानी की यात्रा कर रहे हैं तो नगालैंड की भाजपा सरकार उनका विरोध कर रही है। भाजपा सरकार वहां गो हत्या का समर्थन कर रही है। अरुणाचल में हमारी यात्रा का विरोध करने वाला छात्र नेता कह पा रहा है कि हम पहले उत्तर प्रदेश को रोकें जो देश का सबसे बड़ा गो मांस निर्यातक प्रदेश है। कहा कि हर मंदिर की अपनी गोशाला होनी चाहिए। तिरुपति इसकी शुरुआत करे। बाजार के खरीदे घी से प्रसाद व भोग न बने।
अयोध्या में कराया जाएगा पंचगव्य का सेवन
शंकराचार्य ने कहा कि तिरुपति से आए लड्डू का जो लोग भोग किए हैं, उन्हें पवित्र करने के लिए अयोध्या में मंगलवार को पंचगव्य का वितरण किया जाएगा। इसके लिए यहां पांच स्थानों पर स्टॉल लगाए जाएंगे। ताकि लोग इसका सेवन करके आत्मग्लानि से छुटकारा पा सकें। बहुत सारे लोग पाप बोध से ग्रसित हैं। अभियान का नेतृत्व संतोष दुबे करेंगे।
हमारा अभियान सिर्फ देशी गाय के लिए
शंकराचार्य ने कहा हम यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि हमारा यह गो प्रतिष्ठा आंदोलन गाय नाम से प्रचलित सभी जानवरों, मवेशियों के लिए नहीं है, बल्कि केवल उन गायों के लिए है जो शत-प्रतिशत शुद्ध देशी नस्ल की हैं और शंकर कृत नहीं हैं। उन्हें ही वेदलक्षणा, देसी शुद्ध नस्ल कहा जाता है, जिन्हें हमने रामा नाम दिया है।
देंगे अयोध्या वीर सम्मान
शंकराचार्य ने कहा कि रामलला की मुक्ति में जिनका योगदान है उन सबका सम्मान किया जाएगा। हम एक अयोध्या वीर सम्मान कार्यक्रम का आयोजन करेंगे। इसमें सभी राम भक्तों को सम्मानित करेंगे। इसके अलावा अयोध्या में एक वीर कीर्ति स्तंभ की स्थापना की जाएगी। इसमें राममंदिर आंदोलन से जुड़े सभी राम भक्तों की गाथा लिखी जाएगी।