17- राम मंदिर में शनिवार को सजा रामलला का विग्रह- ट्रस्ट
अयोध्या। रामनगरी में जैसे ही मौसम ने करवट ली, वैसे ही श्रीरामजन्मभूमि परिसर में भी राग-भोग की परंपरा में बदलाव दिखने लगा। सुबह की ठंडक और शाम की नमी को देखते हुए अब रामलला को गुनगुने जल से स्नान कराया जा रहा है। भोग में भी मौसमी परिवर्तन के अनुरूप बदलाव किए गए है। बादाम, काजू, पिस्ता और किशमिश जैसे पौष्टिक ड्राई फ्रूट चढ़ाए जा रहे हैं, ताकि रामलला को सर्दी-जुकाम का कष्ट न हो।
राम मंदिर में रामलला पांच साल के बालक के रूप में विराजमान हैं। ऐसे में उनकी सेवा एक बालक के रूप में ही की जाती है। जब-जब मौसम बदलता है तो उनके राग-भोग में भी बदलाव किया जाता है। मौसम के बदलते स्वरूप को ध्यान में रखते हुए भगवान की सेवा भी उसी अनुरूप ढाली जाती है। स्नान का जल सुबह हल्का गुनगुना रखा जा रहा है। भोग की थाली में अब तुलसी-दल से सुसज्जित खीर, माखन-मिश्री के साथ मेवे का पंचामृत शामिल है। राम मंदिर के पुजारी ने बताया कि अब चूंकि मौसम में सिहरन शुरू हो गई है। सुबह-शाम ठंड होने लगी है, इसलिए बालकराम के राग-भोग में परिवर्तन कर दिया गया है।
बालकराम को सुबह 4:30 बजे जगाया जाता है और उन्हें स्नान कराया जाता है। उन्हें ठंड न लगे, इसलिए अब उन्हें गुनगुने पानी से स्नान कराया जाता है। साथ ही भोग में भी बदलाव किया गया है। भोग में रबड़ी व पेड़ा दिया जा रहा है। ड्राई फ्रूट्स जैसे काजू, बादाम व पिस्ता भी दिया जा रहा है। पिस्ता मिलाकर गर्म दूध दिया जा रहा है। भोजन में पूड़ी व हलुआ परोस रहे हैं।
पहले ही बदला जा चुका है दर्शन का समय
ठंड को देखते हुए रामलला की दर्शन अवधि में पहले ही बदलाव किया जा चुका है। ठंड बढ़ने पर कुछ और बदलाव किए जाएंगे। गर्भगृह में अब कूलर नहीं चलाए जा रहे हैं। पंखे का उपयोग केवल दोपहर में ही किया जा रहा है। जल्द ही रामलला को ऊनी वस्त्र भी पहनाना शुरू किया जाएगा। साथ ही कंबल व रजाई की भी व्यवस्था की जाएगी। अभी रत्न जड़ित सिल्क व रेशमी वस्त्र पहनाए जा रहे हैं जो मुंबई से मशहूर डिजाइनर मनीष त्रिपाठी की ओर से बनाकर भेजे जाते हैं।