राम मंदिर के ध्वजारोहण समारोह ने देश ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया को एक मंच से कई संदेश दिए। समारोह में सर्वधर्म समाज की मौजूदगी से सामाजिक समरसता और रामराज की स्थापना की छाप छोड़ने की कोशिश की गई। रामराज से मानवता की सेवा करने का संदेश दिया गया। इसके लिए प्रभु श्रीराम का उदाहरण दिया गया कि वह भेद से नहीं बल्कि सेवा से जुड़ते रहे। रामराज से ही विकास और विकसित भारत का मंत्र भी दिया गया।
राम मूल्य हैं, मर्यादा हैं, दिशा हैं
नाम लिए बगैर विपक्ष पर हमला
ध्वजारोहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विपक्ष का नाम लिए बगैर हमला बोला। उन्होंने कहा कि आजादी तो मिली, लेकिन मानसिक आजादी नहीं मिल पाई। मानसिकता की गुलामी की जंजीरों में हम जकड़े रहे। हमने नौसेना के ध्वज से गुलामी के हर प्रतीक को हटाया। गुलामी की मानसिकता इतनी हावी हो गई कि प्रभु राम को भी काल्पनिक घोषित किया जाने लगा। अब सबमें राम और कण-कण में राम हैं। आजादी के 70 साल में देश विश्व की 11वीं अर्थव्यवस्था बन पाया, जबकि पिछले 11 साल में यह तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने में सफल हो गया। लोकतंत्र को विदेशों से लेने की बात स्थापित की गई, जबकि हकीकत है कि यह हमारे डीएनए में है।
नौसेना के ध्वज से गुलामी के हर प्रतीक को हटाया
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह बदलाव का समय है। हमने नौसेना के ध्वज से गुलामी के हर प्रतीक को हटाया है और छत्रपति शिवाजी महाराज की विरासत को स्थापित किया। सिर्फ डिजाइन में ही बदलाव नहीं हुआ, बल्कि यह मानसिकता बदलने का क्षण था। यह घोषणा थी कि भारत अपनी शक्ति व प्रतीकों से परिभाषित होगा, न कि किसी और की विरासत से।
मैकाले के गुलामी प्रोजेक्ट को करना होगा ध्वस्त
प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि हम ठान लें तो अगले 10 साल में मानसिक गुलामी से पूरी तरह मुक्ति पा लेंगे। उसके बाद ऐसी ज्वाला प्रज्ज्वलित होगी और ऐसा आत्मविश्वास बढ़ेगा कि 2047 तक विकसित भारत का सपना पूरा होने से कोई रोक नहीं पाएगा। आने वाले 1000 वर्ष के लिए भारत की नींव तभी सशक्त होगी, जब मैकाले के गुलामी प्रोजेक्ट को हम अगले 10 साल में पूरी तरह ध्वस्त कर देंगे।
आगामी एक हजार वर्ष के लिए मजबूत करनी है भारत की नींव
मोदी ने कहा कि रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर राम से राष्ट्र के संकल्प की चर्चा करते हुए मैंने कहा था कि आने वाले एक हजार वर्षों के लिए भारत की नींव मजबूत करनी है। असल में जो सिर्फ वर्तमान की सोचते हैं, वे आने वाली पीढ़ियों के साथ अन्याय करते हैं। हमें वर्तमान के साथ-साथ भावी पीढ़ियों के बारे में सोचना है। जब हम नहीं थे, यह देश तब भी था, जब हम नहीं रहेंगे, यह देश तब भी रहेगा।