विहिप सीधे नहीं हटा सकती, लेकिन प्रभाव रखती है
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट कानूनी रूप से एक स्वतंत्र संस्था है। इसलिए विहिप के पास महासचिव को सीधे हटाने का अधिकार नहीं है। लेकिन चंपत राय विहिप के केंद्रीय उपाध्यक्ष होने के साथ सबसे वरिष्ठ और प्रभावशाली चेहरों में रहे हैं। राम मंदिर आंदोलन के दौरान उनकी भूमिका अहम रही है। ऐसे में संगठन यदि महसूस करता है कि विवाद से उसकी छवि प्रभावित हो रही है तो वह नैतिक आधार पर बदलाव की सलाह दे सकता है। विहिप उन्हें केंद्रीय उपाध्यक्ष के पद से मुक्त करने का दबाव बना सकती है। जांच के निष्कर्षों से पहले ही डैमेज कंट्रोल की रणनीति पर विचार किया जाना स्वाभाविक माना जा रहा है।
एसआईटी की जांच रिपोर्ट और एफआईआर का इंतजार
सोशल मीडिया पर राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारी चर्चा में हैं। लोग उन पर तरह-तरह की टिप्पणियां कर रहे हैं। इनमें महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा और निर्माण कार्यों में सक्रिय रहे गोपाल राव सर्वाधिक निशाने पर हैं। इसके अलावा चंपत राय के करीबी टिन्नू का नाम भी हर किसी की जुबान पर है। चर्चा अब चाक-चौराहों से लेकर घर-घर तक पहुंच गई है। वहीं, एसआईटी की रिपोर्ट और आरोपियों पर एफआईआर का हर किसी को बेसब्री से इंतजार है लेकिन अब तक मामले में पुलिस को तहरीर नहीं मिली है। सीओ अयोध्या आशुतोष तिवारी ने बताया कि अब तक उनके संज्ञान में तहरीर मिलने जैसी बात सामने नहीं आई है।