अयोध्या। हरि अनंत हरि कथा अनंता, कहहि सुनहि बहुबिधि सब संता...अर्थात हरि (भगवान) अनंत हैं और उनकी कथाएं भी अनंत हैं। सभी संत उन्हें अनेक प्रकार से कहते और सुनते हैं। रामचरित मानस की यह पंक्ति राम जन्मोत्सव पर साकार हो रही थी। राम जन्मोत्सव का साक्षी बनने देश-विदेश से श्रद्धालु पहुंचते थे। बोली-भाषा भले ही अलग थी, लेकिन सबके एक ही भाव थे, रामलला के दर्शन...।
रामजन्मोत्सव पर हर जन-मन में राम के ही दर्शन हो रहे थे, श्रद्धालुओं की भीड़ और उत्साह से आस्था का अनाहत स्वर मुखर होता दिखा। बस्ती से आए परमात्मा यादव बोले कि अयोध्या के आलोक में एक ऐसा भाव उभरता है जो सबको एक सूत्र में पिरोता है। राम मंदिर केवल एक मंदिर नहीं बल्कि भारत के दर्शन का मंदिर है। राम जन्मभूमि पथ पर दिख रही भीड़ के जरिए भारत के ही दर्शन हो रहे हैं। सूरत निवासी पूर्णमल जोशी दो दिन से अयोध्या में थे। कहा, प्राण प्रतिष्ठा में नहीं आ सके तो सोचा रामजी के जन्मोत्सव के साक्षी बन जाएं। जनम लियो रघुरइया, अवध मा बाजे बधइया...गीत गुनगुनाते हुए वे राम भक्ति में लीन हो गए। आगरा के अनुज सिंह बोले कि सबसे बड़ी अयोध्या नगरी जहां रामलीन्ह अवतार...सबसे बड़ी तीर्थनगरी अयोध्या है। जो अब तक अयोध्या नहीं आए हैं, वह आएं, अब नहीं आएंगे तो कब आएंगे।
इनसेट
रामजन्मोत्सव के लिए ली नौकरी से छुट्टी
रामनगर कालोनी फैजाबाद निवासी संजय कुमार रामपथ पर जय श्रीराम का उद्घोष करते नजर आए। बताया कि वे सुबह आठ बजे ही फैजाबाद से अयोध्या पहुंच गए थे। एक बार रामलला के दर्शन कर लिए हैं, अभी तृप्ति नहीं मिली है। रामलला के सूर्य तिलक के समय फिर दर्शन करने के लिए मंदिर जाएंगे। कहा कि आज नौकरी से छुट्टी ले ली है। राम से बढ़कर कुछ नहीं, राम की नौकरी व चाकरी से ही जीवन की नैया पार लगेगी। सुल्तानपुर के जय गोविंद भी अपने काम से छुट्टी लेकर राम जन्मोत्सव में शामिल होने पहुंचे थे। कहा रामजी का जन्मोत्सव साल में एक बार ही आता है, इसे उत्सव को नहीं गंवाना चाहते।