अयोध्या। रामनगरी एक बार फिर इतिहास के सबसे पावन अध्याय की साक्षी बनने जा रही है। राम मंदिर के प्रथम तल पर राम दरबार समेत परिसर स्थित सात मंदिरों में भगवान के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा का अनुष्ठान विधिवत रूप से तीन जून से शुरू होगा। इससे पहले दो जून को प्रायश्चित कर्म किया जाएगा। इसके तहत मूर्तियों का शुद्धीकरण वैदिक विधिविधान पूर्वक होगा।
हिंदू शास्त्र के अनुसार किसी भी दिव्य अनुष्ठान से पूर्व प्रायश्चित किया जाना अनिवार्य होता है। यह कर्म आत्मा व स्थान की शुद्धि के लिए किया जाता है। राम मंदिर परिसर में भी प्रायश्चित कर्म से यह दिव्य अनुष्ठान प्रारंभ होगा ताकि मंदिर परिसर, अनुष्ठानकर्ता और समस्त आयोजन शुद्ध और सात्विक वातावरण में संपन्न हो सके। प्राण प्रतिष्ठा का मुहूर्त निकालने वाले आचार्य प्रवीण शर्मा के अनुसार प्राण प्रतिष्ठा से पहले प्रायश्चित कर्म का विधान है। इसी विधान के तहत मूर्तियों का शुद्धीकरण किया जाता है। इस क्रम में मूर्ति को पंचगव्य से स्नान कराया जाएगा। दरअसल मूर्ति को छेनी, हथौड़े से तराशते हैं, उस पर चोट करते हैं। इसको लेकर मूर्ति से माफी मागी जाएगी। इसका शुद्धीकरण होगा।
आचार्य प्रवीण के अनुसार प्रायश्चित केवल धार्मिक नियम नहीं है, बल्कि संवेदनाओं का परिष्कार भी है। एक प्रकार की विनम्र क्षमा याचना है। प्रायश्चित कर्म यज्ञ मंडप के समक्ष पूरा कराया जाएगा। इसी क्रम में यज्ञ मंडप का भी शुद्धीकरण होगा। इसके बाद जिस मूर्तिकार ने मूर्ति बनाई है, उसका पूजन होगा। फिर मूर्ति की आंख पर पट्टी बांध दी जाएगी। कंकन-वंदन की प्रक्रिया होगी। इस प्रक्रिया के तहत मूर्ति के हाथ में ऊन का धागा रक्षा सूत्र के रूप में बांधा जाएगा। मूर्ति की आंख की पट्टी प्राण प्रतिष्ठा के बाद नेत्रों मिलन की प्रक्रिया के बाद खोली जाएगी। यह विधि मुख्य यजमान की ओर से पूरी की जाती है। अबकी बार यह प्रक्रिया सीएम योगी आदित्यनाथ निभाएंगे।
अनुष्ठान से पूर्व दो जून की शाम सरयू तट पर कलश पूजन होगा। यहां पर अनुष्ठान के मुख्य यजमानों का भी पूजन होगा। इसके बाद महिलाएं कलश में सरयू जल भरकर राम मंदिर में प्रवेश करेंगी और यज्ञ मंडप में कलश स्थापित किया जाएगा। आचार्य प्रवीण के अनुसार शास्त्रों में कलश दर्शन को देव दर्शन के समकक्ष माना गया है। कलश यात्रा देवी-देवताओं का आह्वान करती है और भक्तों में भक्ति और श्रद्धा का भाव जगाती है।