16-रामलला के दरबार में चरणामृत का पान करते भूटान के पीएम- ट्रस्ट
अयोध्या। बिहार में चुनावी हलचल के बीच भूटान के प्रधानमंत्री का भारत दौरा खासा अहम माना जा रहा है। बिहार प्रवास पूरा करने के बाद उनका अयोध्या पहुंचना न केवल कूटनीतिक दृष्टि से, बल्कि आस्था के नजरिये से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। भव्य राम मंदिर निर्माण के बाद अयोध्या लगातार वैश्विक मंच पर अपनी पहचान मजबूत कर रही है। भूटान पीएम का यहां आना दोनों देशों के संबंधों में नई ऊर्जा भरने वाला कदम माना जा रहा है। इस दौरे ने कई संदेश भी दिए हैं।
भाजपा नेताओं ने इस दौरे को प्रधानमंत्री मोदी की विदेश नीति की सफलता बताया। रामलला के दरबार में विदेशों के नेता आकर श्रद्धा अर्पित कर रहे हैं। यह भारत की बढ़ती सांस्कृतिक ताकत का परिचायक है। राजनीति के जानकार प्रो़ विक्रमा पांडेय का कहना है कि बिहार चुनावी मौसम में भूटान पीएम का दौरा सीधे तौर पर भले राजनीति से न जुड़ा हो, लेकिन इसका असर जनता की सोच पर पड़ना तय है। यह दौरा भारत की कूटनीति, आस्था और चुनावी सरगर्मी, तीनों को जोड़ता नजर आ रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह संदेश जा रहा है कि अयोध्या केवल भारत का धार्मिक केंद्र ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक कूटनीति का भी अहम केंद्र बन चुकी है।
राजनीति में दिलचस्पी रखने वाले अंजनी गर्ग कहते हैं कि एसआईआर (स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन ) जैसे मुद्दे जनता की व्यावहारिक जरूरतों से जुड़े जरूर हैं, लेकिन चुनावी मैदान में राम मंदिर जैसा भावनात्मक प्रतीक कहीं अधिक असर डालता है। भूटान के पीएम का दर्शन करना इसे अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य भी देता है, जिससे यह मुद्दा और मजबूत होता है। रोजगार और महंगाई पर सवालों के बीच जनता का ध्यान ‘राम मंदिर’ जैसे भावनात्मक मुद्दे की ओर खिंच सकता है। स्थानीय मुद्दों की तुलना में अयोध्या जैसी राष्ट्रीय आस्था जनता को ज्यादा जोड़ती है।