अयोध्या। रामनगरी में प्राण प्रतिष्ठा के दौरान रामपथ और धर्मपथ पर रोपित किए गए हजारों पौधे देखरेख के अभाव में नष्ट हो गए हैं। धर्मपथ पर उगाई गई घास भी सूख गई है। शहर के अन्य हिस्सों में भी पौधों का यही हाल है। इनका संरक्षण वन विभाग के लिए चुनौती बन गया है।
दिसंबर और जनवरी के बीच अयोध्या धाम में अलग-अलग सड़कों के किनारे करीब 50,000 पौधे रोपित किए गए थे। देश के कई राज्यों से अलग-अलग किस्म के पौधे और खास तरह की घास मंगाकर लगाई गई थी, लेकिन श्रद्धालुओं की भीड़ हरियाली पर भारी पड़ी। हालांकि हजारों पौधों को सीमेंट की जाली बनाकर सुरक्षित भी किया गया था, लेकिन इतना सब करने के बाद इन पौधों की देखरेख सही से नहीं की गई।नतीजतन हजारों पौधे सूख गए। अब पौधों की दशा को देखते हुए वन विभाग की ओर से इनके संरक्षण के लिए रोडमैप तैयार किया जा रहा है। अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक मध्य क्षेत्र रेणु सिंह के निर्देश पर अब धर्मपथ और रामपथ समेत अयोध्या धाम में सड़क किनारे व डिवाइडरों पर लगाए गए सभी पौधों को संरक्षित किया जाएगा। इसके लिए तार व बांस की बाड़ लगाने का काम जल्द ही शुरू होगा। सूख रहे पौधों को खाद पानी देकर संरक्षित करने का प्रयास किया जाएगा।
प्राण प्रतिष्ठा के दौरान धर्मपथ के डिवाइडर और किनारों पर करीब 12,000 बोगनवेलिया और 200 तबेबुइया रोजिया के पौधे रोपित किए गए थे। इसके अलावा रामपथ पर भी करीब 30,000 अलग-अलग प्रजातियों के पौधे लगाए गए थे। लेकिन अब तक इनके चारों ओर किसी तरह का घेराव नहीं किया गया। इससे श्रद्धालुओं की भीड़ में किसी न किसी का पैर इन पौधों पर पड़ता गया और धीरे-धीरे ये नष्ट होते गए। इतना ही नहीं, धर्मपथ पर कोलकाता से लाई गई घास लगाई थी, वो भी देखरेख में अभाव में आधी सूख चुकी है।
अयोध्या धाम में रामपथ और धर्मपथ के साथ-साथ जहां कहीं भी सड़क किनारे पौधे लगे हैं। सभी को संरक्षित करने के लिए अभियान चलाकर बांस की बाड़ और तारों से संरक्षित किया जाएगा। साथ ही पौधों के लिए खाद पानी की व्यवस्था भी की जाएगी। - प्रणव जैन, प्रभागीय वनाधिकारी