4- साकेतपूरी कॉलोनी स्थित पेट्रोल पंप पर तेल भरवाते लोग, घटी लोगों की भीड़ -संवाद
अयोध्या। पेट्रोल-डीजल की कमी की अफवाह ने जिले में ईंधन खपत और बिक्री दोगुनी से अधिक कर दी। 23 से 27 मार्च के बीच महज पांच दिनों में लगभग 48.91 लाख लीटर पेट्रोल-डीजल की खपत दर्ज की गई और करीब 45 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ। इस दौरान पेट्रोल पंपों पर ऑनलाइन भुगतान व्यवस्था ठप रही और बिक्री नकद में की गई।
23 मार्च को 2.56 लाख लीटर पेट्रोल और 4.11 लाख लीटर डीजल की बिक्री हुई, जिसकी कीमत करीब 6.08 करोड़ रुपये रही। 24 मार्च को यह बढ़कर 5.96 लाख लीटर पेट्रोल और 8.77 लाख लीटर डीजल पहुंच गई। इससे लगभग 13.46 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ।
25 मार्च को कई पंप ड्राई होने के बावजूद 5.38 लाख लीटर पेट्रोल और 6.71 लाख लीटर डीजल की बिक्री हुई, जिसकी कीमत करीब 11.08 करोड़ रुपये रही। 26 मार्च को 3.95 लाख लीटर पेट्रोल और 6.31 लाख लीटर डीजल के साथ करीब 9.36 करोड़ रुपये का कारोबार हुआ। वहीं, 27 मार्च को लगभग 5.16 लाख लीटर ईंधन की खपत के साथ करीब 5.10 करोड़ की बिक्री का अनुमान है।
तीन दिन तक पंपों पर हाहाकार : 23 मार्च की दोपहर बाद फैली अफवाह ने शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक हड़कंप मचा दिया। शाम होते-होते पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें लग गईं और कई जगह तेल खत्म होने के बोर्ड लग गए। स्थिति इतनी बिगड़ी कि कई पंपों पर 100 रुपये तक पेट्रोल और 200-500 रुपये तक डीजल देने की सीमा तय करनी पड़ी।
भीड़ नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल तैनात करना पड़ा। 23 मार्च की तुलना में 24 मार्च को पेट्रोल की बिक्री में 133 प्रतिशत और डीजल में 114 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। सुबह पांच बजे से ही लाइनें लग गईं और कई लोग घंटों इंतजार के बाद भी खाली लौटे। 26 मार्च से हालात धीरे-धीरे काबू में आने लगे और शुक्रवार को मार्च को प्रशासन की सक्रियता के बाद अधिकांश पेट्रोल पंपों पर आपूर्ति सामान्य हो गई। डिब्बों में डीजल बंद, कामकाज ठप : प्रशासन ने 24 मार्च को डिब्बों में पेट्रोल-डीजल देने पर रोक लगा दी, जिसका असर अगले दिन से दिखा। डीजल न मिलने से किसानों, छोटे व्यापारियों और दैनिक कामकाज पर निर्भर लोगों की मुश्किलें बढ़ गईं। वजीरगंज के दुकानदार रामकुमार ने बताया कि डीजल न मिलने से चक्की बंद करनी पड़ी। वहीं, नाका क्षेत्र में गन्ना पेराई करने वाले प्रदीप कुमार का कहना है कि डिब्बे में डीजल न मिलने से दुकान बंद करनी पड़ी।