अयोध्या। चकबंदी आयुक्त के फर्जी पत्र के आधार पर बंदोबस्त अधिकारी कार्यालय में तैनात लेखपाल के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश हुआ है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सुधांशु शेखर उपाध्याय ने बृहस्पतिवार को यह आदेश दिया है। कोतवाली नगर पुलिस को एक सप्ताह के अंदर केस दर्ज करके कोर्ट को सूचित करने का आदेश दिया है। न्यायालय में प्रस्तुत प्रार्थना पत्र के अनुसार बीकापुर क्षेत्र के तोरोमाफी निवासी शिवबरन एक चालबाज व्यक्ति है। वह कहीं नौकरी में नहीं रहा है, फिर भी धोखाधड़ी के सहारे 15 मई, 1998 को चकबंदी आयुक्त का फर्जी पत्र तैयार कर लेखपाल के पद पर होने के आधार पर अपना स्थानांतरण मथुरा से अंबेकरनगर चकबंदी कार्यालय में करवा लिया। 10 जून, 1998 को मथुरा के बंदोबस्त अधिकारी के कार्यालय से जारी फर्जी पत्र के आधार पर रिलीव करवा लिया। 17 जून, 1998 को अंबेडकर नगर के बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी स्थित सिविल लाइन फैजाबाद में लेखपाल के पद पर ज्वाइन कर लिया। विभाग से नौ महीने तक लेखपाल का वेतन लेता रहा। विभागीय जांच में फर्जी आदेश की पोल खुल गई। फर्जी लेखपाल शिवबरन को विभाग ने बर्खास्त कर दिया, लेकिन आपराधिक कार्यवाही नहीं की गई। थाना हैदरगंज क्षेत्र के रंडोली पश्चिम पाली गांव निवासी अशोक कुमार वर्मा ने सूचना अधिकार से जानकारी हासिल करके पुलिस अधिकारियों से मामले की जांच कर रिपोर्ट दर्ज करने की मांग की। इसके बाद शिव बरन अपने लड़के रोहित के साथ मिलकर अशोक को धमकाने लगा।