अयोध्या। अवधेश प्रसाद के पुराने गढ़ सोहावल (वर्तमान में बीकापुर विधानसभा क्षेत्र) ने अपने पुराने नेता पर खूब आशीर्वाद लुटाया। यहां से उन्हें सर्वाधिक 29,684 मतों की बढ़त मिली, जो निर्णायक रही। वहीं, रुदौली-दरियाबाद विधानसभा सीटों से मिली बढ़त उनके लिए संजीवनी साबित हुई और वह भगवा गढ़ में साइकिल चलाने में कामयाब रहे।
नवनिर्वाचित सांसद अवधेश प्रसाद 2007 तक सोहावल विधानसभा सुरक्षित सीट से सात बार विधायक रहे हैं। इस क्षेत्र में पार्टी के मूल मतों के अलावा सवर्ण मतों में भी उनकी पकड़ रही है। 2012 और 2022 में वह मिल्कीपुर सुरक्षित सीट से भले ही चुनाव जीते, लेकिन अपने पुराने गढ़ से उन्होंने नाता नहीं तोड़ा। अपने पैतृक गांव सुरवारी लच्छन का तिवारी का पुरवा समेत अन्य क्षेत्रीय लोगों में उन्होंने अपनी पैठ मजबूत रखी, जिसका उन्हें लोकसभा चुनाव में खूब फायदा मिला।
लगातार दो बार से यहां भाजपा विधायक होने के बाद भी सपा को 1,22,543 वोट मिले और भाजपा प्रत्याशी महज 92,859 वोट ही पा सके। इस तरह उन्होंने 29,684 मतों की बढ़त ली। जबकि पिछले चुनाव में लल्लू सिंह यहां से 1,03,648 मत पाकर 8803 मतों से जीते थे। वहीं, पिछले चुनावों में लल्लू सिंह को मजबूत बढ़त देने वाली बाराबंकी की दरियाबाद विधानसभा भी इस बार सपा प्रत्याशी पर मेहरबान दिखी।
पिछले चुनाव में यहां लल्लू सिंह ने 27,124 मतों की बढ़त हासिल की थी, लेकिन इस बार यहां अवधेश प्रसाद का जलवा शुरू से ही देखने को मिला। वह 10,094 मतों से यहां भी जीत गए। तीन विधानसभा चुनाव से रुदौली विधानसभा क्षेत्र मेंं काबिज भाजपा यहां भी औंधे मुंह गिर गई। पिछले चुनाव में यहां से भाजपा ने 11,011 की बढ़त ली थी, लेकिन इस बार सपा ने 11,703 मतों की बढ़त बनाकर अपनी जीत का मार्ग प्रशस्त कर लिया।
सपा से जुड़ गए थे रुदौली और दरियाबाद के दो कद्दावर नेता
टिकट मिलने के बाद अवधेश प्रसाद ने रुदौली व दरियाबाद विधानसभा के सपा से नाराज चल रहे दो कद्दावर नेताओं को साधना शुरू कर दिया था। रुदौली से दो बार विधायक रहे सैय्यर अब्बास अली जैदी उर्फ रुश्दी मियां को बसपा से व पार्टी छोड़ चुके पूर्व मंत्री राजीव सिंह के पुत्र को उन्होंने पार्टी में जोड़ लिया। इन क्षेत्रों में हार के प्रमुख कारण माने जाने वाले इन नेताओं के लामबंद होने से भी वहां समीकरण बदलने के दावे किए जा रहे हैं।