अयोध्या। निर्मला अस्पताल प्रकरण में अब तक मुख्य स्थायी अधिवक्ता से विधिक राय नहीं मिल सकी है। इस वजह से आगे की कार्रवाई फिलहाल लंबित है। हालांकि, हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में अस्पताल प्रबंधन को नए सिरे से कारण बताओ नोटिस जारी करने की तैयारी की जा रही है।
अयोध्या धाम के हलकारा का पुरवा निवासी सरोज कौशल (50) की 15/16 दिसंबर की रात 12:08 बजे लखनऊ के एक निजी अस्पताल में मौत हो गई थी। परिजनों ने साकेतपुरी कॉलोनी स्थित निर्मला अस्पताल में हिपेरिन नामक इंजेक्शन की ओवरडोज से उनकी मौत का आरोप लगाया था। अस्पताल प्रबंधन से मिला सहमति पत्र भी वायरल हुआ था। तत्कालीन सीएमओ ने 17 दिसंबर को अस्पताल में मरीज भर्ती पर रोक लगा दी थी।
दो दिन बाद भूतल में चल रहा आईसीयू सील कर दिया गया था। 29 दिसंबर को ओटी सील करते हुए पंजीकरण रद्द कर दिया था। अस्पताल प्रबंधन ने इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिस पर 16 जनवरी को न्यायालय का फैसला आया है। न्यायालय ने सीएमओ के 29 दिसंबर के आदेश को रद्द करके कार्रवाई के लिए प्रक्रिया अपनाते हुए कारण बताओ नोटिस देने, अस्पताल का पक्ष सुनकर कार्रवाई का आदेश दिया है।
अस्पताल प्रबंधन ने अगले दिन ही अस्पताल पर लगी रोक हटाने की मांग की थी। सीएमओ ने सिर्फ 29 दिसंबर के आदेश के रद्द होने का दावा करके मरीज भर्ती करने पर लगी रोक नहीं हटाई। बल्कि 21 जनवरी को उच्च न्यायालय के मुख्य स्थायी अधिवक्ता को पत्र लिखकर विधिक राय मांगी। ओटी खोलने की अनुमति दी गई और पंजीकरण के लिए आवेदन मांगा गया था। इधर, 10 दिन बीतने के बाद भी अब तक विधिक राय नहीं मिल सकी है। इस वजह से बहुचर्चित इस मामले में आगे की कार्रवाई लंबित है।
सीएमओ डॉ. देवेंद्र कुमार भिटौरिया ने बताया कि अब तक विधिक राय नहीं मिली है, जिसके लिए रिमाइंडर भेजा गया है। अभी मरीज भर्ती करने पर रोक बरकरार है। हाईकोर्ट के आदेशों के अनुपालन के लिए नए सिरे से कारण बताओ नोटिस भेजने की प्रक्रिया चल रही है। छह सप्ताह के भीतर मामले का निस्तारण करना है।