अयोध्या। अयोध्या ने बुधवार को एक और इतिहास रचा। देश की प्रथम नागरिक द्रोपदी मुर्मू ने नव्य-भव्य मंदिर में रामलला के दर्शन किए। नए मंदिर में रामलला के दर्शन करने वालीं वह पहली राष्ट्रपति बनीं। इससे पहले पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भी रामलला के दर्शन किए थे, लेकिन तब रामलला अस्थाई मंदिर में विराजमान थे। अब रामलला एक करोड़ से निर्मित भव्य महल में विराजमान हैं। राष्ट्रपति ज्ञानी जैल सिंह भी अयोध्या आए थे, लेकिन वे रामलला के दरबार नहीं गए थे।
रामनगरी को दुनिया की प्रथम नगरी माना जाता है। सृष्टि के प्रथम मनुष्य महाराज मनु ने इसकी स्थापना की थी। युगों का सफर तय करने के बाद भी रामनगरी की धार्मिक आभा निरंतर चमत्कृत होती रही। फैजाबाद गजेटियर के अनुसार 1902 में तत्कालीन आईसीएस आरसी होबर्ट, जिलाधिकारी फैजाबाद ने इस नगरी की पौराणिकता को देखते हुए एडवर्ड, अयोध्या तीर्थ विवेचनी सभा नाम की एक समिति का गठन किया था। विवेचनी सभा ने एडवर्ड सप्तम के राज्यारोहण समारोह पर वर्ष 1902 में अयोध्या के 148 मठ-मंदिरों, कुंडों, सागरों व अन्य पौराणिक स्थलों पर एडवर्ड के नाम के शिलापट लगवाए थे। सुप्रीम कोर्ट में राममंदिर के पक्ष में फैसले के लिए जो मील का पत्थर साबित हुए थे।
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अयोध्या पर आधिपत्य जमाने की कई कोशिशें भी हुईं। मंदिर-मस्जिद विवाद के चलते अयोध्या सदियों तक संतप्त रही, लेकिन टेंट से रामलला के भव्य मंदिर में विराजते ही अयोध्या का संताप मिट गया। अयोध्या में देश-दुनिया उमड़ रही है। पिछले चार सालों में रामलला के दरबार में अनेक नामचीन हस्तियां माथा टेक चुकी हैं, यह अयोध्या के गौरव की पुनर्स्थापना का ही संकेत है।
जिन गलियों में सिर्फ सुरक्षा बलों के बूटों की धमक सुनाई देती थी, आज उसी अयोध्या में बजाओ ढोल स्वागत में मेरे घर राम आए हैं...का गीत गूंज रहा है। यह समृद्धि व संपन्नता का भी गीत है। प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री बार-बार आ रहे हैं, राष्ट्रपति आ रही हैं, यह बड़ा संदेश है। - महंत शशिकांत दास
29 अगस्त 2021 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अयोध्या पहुंचे थे। रामायण कान्क्लेव में राम व अयोध्या की महिमा बताई थी। अब राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू अयोध्या आईं, करीब तीन घंटे तक रहीं और धार्मिकता में लीन रहीं। अयोध्या और रामलला की कृपा से मानो पूरे देश में भक्ति के एक नए आंदोलन का सूत्रपात हो गया है।- महंत जनार्दन दास
पांच मई को पांचवीं बार आएंगे पीएम
पांच मई को अयोध्या एक बार फिर इतिहास रचेगी। एक सप्ताह के भीतर राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों अयोध्या में आकर रामलला के दर्शन करेंगे। यह पहली बार होगा जब राष्ट्रपति के अयोध्या आगमन के ठीक चार दिन बाद प्रधानमंत्री अयोध्या आएंगे। हालांकि पीएम मोदी का यह दौरा राजनीतिक होगा, क्योंकि वे अयोध्या में लोकसभा चुनाव को लेकर रोड शो करने आ रहे हैं। फिर भी वे रामलला के दरबार में हाजिरी लगाने जाएंगे।