अयोध्या। डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय में बहु प्रवेश और निकास नीति लागू कर दी गई है। अब नई शिक्षा नीति के तहत स्नातक स्तर पर दूसरे, तीसरे और चौथे वर्ष में प्रवेश अनुमन्य होगा। इस नीति को कार्य परिषद की ओर से अनुमोदित भी कर दिया गया है।
कुलसचिव उमानाथ की ओर से आवासीय परिसर के सभी संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, निदेशक और समन्वयकों को इस संबंध में पत्र जारी किया गया है। इसके साथ ही इस नीति के लागू होने की जानकारी से सभी संबंद्ध कॉलेजों के प्राचार्य और पाठ्यक्रम समिति के संयोजकों को भी अवगत करा दिया गया है। इसके माध्यम से नीति के प्रभावी क्रियान्वयन की अपेक्षा की गई है।
बहु प्रवेश नीति के तहत स्वयं के लिए विद्यार्थी को अपना प्रार्थना पत्र कुलसचिव को देना होगा। कुलसचिव इसे संबंधित विभागाध्यक्ष या प्राचार्य के पास भेजेंगे। इनकी ओर से नियमानुसार प्रवेश प्रक्रिया संपन्न करवाई जाएगी। अपने खुद के विश्वविद्यालय में बहु प्रवेश के लिए किसी प्रकार की समतुल्य समिति नहीं होगी। विद्यार्थी जिस विश्वविद्यालय को छोड़कर प्रवेश के लिए आ रहे हैं, उसे जनक विश्वविद्यालय और जहां प्रवेश चाहते हैं, उसे मेजबान विश्वविद्यालय के रूप में जाना जाएगा।
मेजबान विश्वविद्यालय में विद्यार्थी को स्नातक स्तर पर दूसरे, तीसरे और चौथे वर्ष में प्रवेश अनुमन्य होगा। सबसे पहले विद्यार्थी को अपने जनक विश्वविद्यालय से एक वर्षींय सर्टिफिकेट, दो वर्षीय डिप्लोमा और तीन वर्षीय डिग्री के प्रमाण पत्र के साथ कुलसचिव का अनापत्ति प्रमाण पत्र देना होगा। इसके साथ ही विद्यार्थी से संबंधित तीन वर्षीय पाठ्यक्रम का सिलेबस भी उपलब्ध कराना होगा। इसे मेजबान विश्वविद्यालय के कुलसचिव कार्यालय में जमा करना होगा।
इसी कड़ी में कुलपति के अनुमोदन से कुलसचिव की ओर से एक समतुल्य समिति का गठन करवाया जाएगा। इस समिति के अध्यक्ष संबंधित संकायाध्यक्ष और सदस्य विभागाध्यक्ष व एकेडमिक अनुभाग के उप कुलसचिव व सहायक कुलसचिव होंगे। यह समिति जनक और मेजबान विश्वविद्यालय के सिलेबस का गहन परीक्षण करेगी। समिति की ओर से अपनी संस्तुति कुलसचिव को दी जाएगी। यदि दोनों विश्वविद्यालय के सिलेबस में 70 फीसदी की समरूपता पाई जाती है तो विद्यार्थी को मेजबान विश्वविद्यालय में प्रवेश के लिए योग्य माना जाएगा।
प्रवेश की स्थिति में कुलपति के अनुमोदन पर कुलसचिव संबंधित विद्यार्थी के प्रकरण को संबंधित विभागाध्यक्ष को संदर्भित करेंगे। विभागाध्यक्ष ईडीपी के माध्यम से उनका प्रवेश कराएंगे। परीक्षा नियंत्रक विद्यार्थी की अपार आईडी में क्रेडिट ट्रांसफर सुनिश्चित कराएंगे। इसकी सूचना जनक विश्वविद्यालय को भी भेजी जाएगी। शुरू में यह व्यवस्था ऑफलाइन रहेगी, बाद में ऑलाइन किया जाएगा।
इसी तरह निकास नीति के तहत महाविद्यालय और विश्वविद्यालय परिसर के विद्यार्थी पहले, दूसरे, तीसरे और चौथे वर्ष के बाद अपने पाठ्यक्रम से निकास कर सकते हैं। संबंधित विद्यार्थी जो निकास करना चाहते हैं, वे विभागाध्यक्ष या प्राचार्य को एक प्रार्थना पत्र अपने पाठ्यक्रम का उल्लेख करते हुए प्रस्तुत करेंगे। इसे अनुशंसा के साथ परीक्षा नियंत्रक कार्यालय को भेजा जाएगा। परीक्षा नियंत्रक ईडीपी के माध्यम से प्रमाण पत्र तैयार कर प्रदान करवाएंगे।