मिल्कीपुर उपचुनाव के समीकरण।
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चुनाव में सपा और भाजपा दोनों के साथ ऐसे कुछ समीकरण हैं जिससे उन्हें कुछ फायदा है तो नुकसान भी। भाजपा के चंद्रभानु पासवान को टिकट मिलने के बाद अन्य दावेदार नाराज हो गए। इनमें पूर्व विधायक बाबा गोरखनाथ, रामू प्रियदर्शी भी थे, लेकिन बाद में मुख्यमंत्री के आश्वासन पर सभी नाराज नेता चुनाव प्रचार में शामिल हो गए। सपा के लिए फायदे की बात यह है कि पूर्व मंत्री व कद्दावर नेता मित्रसेन यादव के बेटे आनंद सेन साथ हैं। पहली बार सेन परिवार अवधेश प्रसाद के साथ आया है। हालांकि, उसे बागी व आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) प्रत्याशी सूरज चौधरी से नुकसान पहुंच सकता है।
सूरज सांसद अवधेश प्रसाद का करीबी बताया जाता है और चुनाव की घोषणा से कुछ दिन पहले उन्होंने परिवारवाद व अन्य गंभीर आरोप लगाते हुए सपा से किनारा कर लिया था। इसके साथ ही कांग्रेस के साथ होने के बाद भी पार्टी के कद्दावर नेता भोलानाथ भारती मैदान में हैं। कांग्रेस की ओर से नोटिस दिए जाने के बाद भी वह मैदान से नहीं हटे। भोलानाथ ने जिला पंचायत चुनाव में सपा प्रत्याशी तथा अवधेश प्रसाद के बेटे अजित प्रसाद को हराया था। इस वजह से उनका क्षेत्र में जनाधार बताया जाता है। सपा परिवारवाद के आरोप से भी जूझ रही है। सपा पर सत्ताधारी दल की ओर से लगातार इसको लेकर हमले किए जा रहे हैं। वह इसे भुनाने में लगी हुई है।
इलाके के लोगों का कहना है कि क्षेत्र के विकास की बात होनी चाहिए। बेरोजगारी कैसे दूर हो, इसकी चिंता हो। कैसे युवाओं का अन्य जगहों पर रोजी-रोटी की तलाश में जाना रुके, इस पर ध्यान होना चाहिए। मुद्दे पर तो बात ही नहीं हो रही है, सब अपनी पार्टी के लिए वोट मांग रहे हैं। आखिर नई पीढ़ी के सामने रोजी-रोजगार के क्या साधन होंगे, पढ़ाई लिखाई, स्वास्थ्य की कैसी व्यवस्था होगी, यह प्राथमिकता होनी चाहिए। चाहे इलाके में सभाएं हों या रोड शो या पार्टियों की बैठकें सभी में वादे किए जा रहे हैं, लेकिन किसी ने भी ठोस एलान नहीं किया। यह नहीं बताया कि रोडमैप क्या होगा।