अयोध्या। मौसम में बदलाव का असर पशुओं के दूध उत्पादन पर भी पड़ सकता है। गर्मियों में बारिश बढ़ने के साथ दूध उत्पादन घटने का रुझान सामने आया है, जबकि दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान बारिश और दूध उत्पादन में एक ही दिशा में बदलाव देखा गया। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुमारगंज के कृषि मौसम विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों ने वर्ष 2006 से 2025 तक के आंकड़ों का विश्लेषण कर यह निष्कर्ष निकाला।
शोध के अनुसार, गर्मियों के दौरान बारिश और दूध उत्पादन में विपरीत रुझान देखा गया। जिन आंकड़ों में बारिश बढ़ी, उनमें दूध उत्पादन घटने की प्रवृत्ति सामने आई। इसके विपरीत, दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान बारिश और दूध उत्पादन में एक ही दिशा में बदलाव दर्ज किया गया। वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया कि ये आंकड़े दोनों के बीच संबंध दर्शाते हैं। इससे यह साबित नहीं होता कि बारिश बढ़ने से ही दूध उत्पादन घटता या बढ़ता है।
वैज्ञानिकों ने गर्मियों में अधिकतम और न्यूनतम तापमान की तुलना भी दूध उत्पादन के आंकड़ों से की। अध्ययन में विभिन्न मौसमों के दौरान बारिश के आंकड़ों में भी बड़ा अंतर मिला। वैज्ञानिकों के आकलन के अनुसार, मानसून के दौरान बारिश में बदलाव 27.6 प्रतिशत रहा, जबकि मानसून के बाद यह बढ़कर 144.4 प्रतिशत तक पहुंच गया।
यह अध्ययन कृषि मौसम विज्ञान विभाग के वैज्ञानिकों नीशू खरवार, एके सिंह, एसआर मिश्रा, अभय कुमार पटेल और एएन मिश्रा ने किया। इसके लिए विश्वविद्यालय के डेयरी फार्म में पाले जा रहे दुधारू पशुओं के दूध उत्पादन और मौसम से जुड़े 20 वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।